Na Stree Hai Na Purush – न स्त्री हैं न पुरुष – अकबर बीरबल की कहानियाँ

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Na Stree Hai Na Purush
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अगर आपको भी अकबर बीरबल की रोचक कहानियां पढने और सुनने का शौक है तो आप बिलकुल ठीक जगह पर आये है आज मैं आपसे अकबर और बीरबल की एक रोचक कहानी बताने जा रहा हूँ जिसमे बीरबल ने अपने बुद्धि के बल से प्रश्नों के उत्तर तो दिए ही साथ ही अपने लिए बुरा चाहने वालो को भी सही उत्तर दिया | आज की हमारी कहानी का शीर्षक है Na Stree Hai Na Purush – न स्त्री हैं न पुरुष

Na Stree Hai Na Purush – न स्त्री हैं न पुरुष 

एक दिन बादशाह और उनके मंत्री से आपस में कुछ बातें हो रही थीं, इसी बीच बीरबल की बात आई। तब मंत्री ने बीरबल की बड़ी निंदा की। यह बादशाह का मुंह लगा मंत्री था इसलिये खुलेआम उसकी अवहेलना करना उचित न समझकर प्रमाणों द्वारा मुहतोड़ उत्तर देना शुरू किया।

वह बोले-“तुम स्वयं विचारकर देखो कि मेरे दरबार में बीरबल सा हाजिर जवाब एक आदमी भी नहीं है।”

मंत्री बादशाह के मुख से बीरबल की प्रशंसा सुनकर मनही मन भड़क उठा और बोला-“हुजूर ! यदि आप बीरबल को हाजिर जवाब बतलाते हैं तो वह मेरे तीन सवालों का जवाब दे। यदि ठीक 2 उत्तर भी दे देगा तो भी मैं उसे श्रेष्ठ मान लूँगा। Na Stree Hai Na Purush

बादशाह ने उससे सवाल पूछने को कहा । मंत्री बोला-” 1.आकाश में तारों की कितनी संख्या है ? 2.दुनियाँ में स्त्री पुरुष अलग अलग कितने हैं ? 3.धरती अपना बीच कहाँ रखती है।”

बादशाह ने मंत्री को अपने पास बुला कर बैठाया और बीरबल को बुलवाने के लिये सिपाही भेजा। जब बीरबल आये तो उनसे मंत्री के द्वारा पूछे गये तीनों सवालो’ का उत्तर माँगा। बीरबल ने बादशाह से कुछ समय माँगा और जल्द ही दरबार में हाजिर होने का विश्वास कराया |

इतने में बीरबल बाजार से एक बड़ा घोडा खरीद लाये और उसे बादशाह के सामने खड़ा कर बोला-“मंत्री साहब ! इसके पीठ के बालों की गणना कर ले। इसके शरीर में जितने बाल हैं उतने ही आकाश में तारे भी हैं। Na Stree Hai Na Purush फिर इधर उधर गौर से पड़ताल कर एक जगह जमीन में खूटी गाड़ कर बोला “बादशाह सलामत ! पृथ्वी का मध्य यही है, यदि मंत्री को यकीन न हो तो स्वयं नाप सकते है|

जब पहले और तीसरे सवालों के उत्तर मिल गये तो बादशाह ने दुसरे प्रश्न का उत्तर जानने के लिए बीरबल से कहा- “बीरबल ! पहले और तीसरे प्रश्न का उत्तर मिल गया लेकिन दुसरे प्रश्न का उत्तर क्या है?

दूसरे उत्तर देने की बारी आई तो बीरबल हंस पड़ा और बादशाह को उत्तर दिया-“जहाँपनाह यह मंत्री जी मौलाना साहब है या फिर कोई स्त्री| इनके कारण स्त्री और पुरुषों की संख्या बिगड़ गई है क्योंकि ये न तो स्त्रियों की संख्या में आते हैं और न पुरुषों के ही Na Stree Hai Na Purush,क्योकि इनकी हरकते तो स्त्रियों की तरह है लेकिन दिखते पुरुष है| यदि ऐसे लोगो को जान से मरवा दिये जाये तो ठीक ठीक गणना निकल सकती है।”

मंत्री मौलाना साहब का मुंह छोटा हो गया। उसके मुंह से एक बात भी न निकली। बादशाह ने उसे बहुत कुछ भला बुरा सुनाया। बिचारा लाज का मारा, दुम दबाकर दरबार से चला गया। दूसरी तरफ बादशाह ने बीरबल को पारितोषिक देकर बिदा किया।

शिक्षा : बुद्धि से लिया गया निर्णय हमेशा ही ठीक होता है |

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