Moral Stories in Hindi – बच्चो की नैतिक और शिक्षाप्रद कहानियां

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बड़े बुजुर्गो से हमने अक्सर ही कहते हुए सुना है कि बच्चे कच्चा घडा होते है,उन्हें जैस ढाला जाता है उन्हें जैसे संस्कार दिए जाते है बच्चे उसी प्रकार का आचरण करते है| आज मै बच्चो के लिए Moral Stories in Hindi  बच्चो की नैतिक और शिक्षाप्रद कहानियां  लेकर आया हूँ जिसमे आपको कहानियो के साथ साथ शिक्षा भी मिलेगी सभी Moral Stories अर्थात किसी न किसी शिक्षा के साथ मिलेगी |

आज इंटरनेट के चलन के दौरान बच्चे सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर में गेम खेलते है या फिर विडियो ही देखते है लेकिन आप बच्चो को हमारी वेबसाइट की कहानियां (Story) भी पढने के लिए प्रेरित कर सकते है यहाँ विभिन्न प्रकार की कहानियां आपको मिल जाएगी  :-

Moral Stories in Hindi – बच्चो की नैतिक और शिक्षाप्रद कहानियां

1.रीछ की समझदारी 

एक शिकारी जंगल में शिकार खेलने गया था कंधे पर लम्बी नाल की बन्दुक थी और कमर पर कारतूस की पेटी बंधी थी | सामने ऊँचा पर्वत था शिकारी के मन में विचार आया क्यों न मै पर्वत पर चलकर देखूं वहां गुफाओ में मुझे कोई न कोई जानवर जरुर ही मिल जाएगा |

पतली सी पगडंडी पर्वत के ऊपर शिखर की तरफ जा रही थी| उसे अचानक याद आया “सुना है पर्वत पर जंगली बेर है जो बहुत ही पके और मीठे होते है क्यों न उन्हें भी चखा जाये और बेर रीछ और बाकि जानवरों के भी पसंदीदा होते है चलो चला जाये और खुद से ही बडबडाते हुए वह उस पगडंडी से पर्वत की तरफ बढ़ चला”|

Moral Stories in Hindi

कुछ दूर चलने पर उसने देखा एक रीछ का छोटा बच्चा उससे कुछ दूर उसी पगडंडी से जा रहा है | उसने सोचा क्यों न इसी का शिकार किया जाये और यह कहकर उसने उस पर निशाना साधा तबी उसके मन में ख्याल आया कि शायद हो सकता है इसके माँ और साथी रीछ कही आस पास ही हो तो पहले मुझे इसकी पड़ताल करनी होगी नही तो मेरे प्राण संकट में आ सकते है |

पड़ताल करने के विचार से शिकारी उसके पीछे पीछे चुपचाप चलने लगा | कुछ दूर चलने के बाद जंगल में एक सुखा नाला मिला जिसमे बरसात के दिनों में पानी रहता था और बाकि समय वह नाला सुखा रहता था| सभी जानवर उस नाले के ऊपर गिरे हुए एक नारियल के पेड़ के सहारे उस नाले को पार करते थे |

रीछ का बच्चा उसी नारियल के पेड़ के सहारे जाने लगा तभी शिकारी ने देखा की दूसरी तरफ से एक बड़ा रीछ उसी नारियल के पेड़ के सहारे आने लगा यह देखकर शिकारी खुश हो गया कि आज तो एक साथ दो शिकार मिल गये मै इनमे से किसी को भी मारूंगा तो दूसरा गोली की आवाज सुनकर नाले में गिर जायेगा |

नारियल का पेड़ इतना पतला था की वहां से पीछे लौटना संभव नही था और न ही एक साथ निकलना,दोनों ही आगे बढे जा रहे थे| अब शिकारी यह सब बड़े गौर से देखने लगा | दोनों रीछ अब आमने सामने आ खड़े हुए थोड़ी देर तक एक दुसरे को देखते रहे और न जाने क्या वाद विवाद किया इतने में दोनों रीछ ने कुछ भी हरकत नही की |

कुछ मिनट बाद बड़ा रीछ चुपचाप जैसे थे वैसे ही शांत बैठ गया और दूसरा छोटा रीछ उस बड़े के ऊपर चढ़ गया और चढ़कर दूसरी तरफ निकल गया | और उसके निकलने के बाद बड़ा रीछ उठा और अपने रास्ते की तरफ बढ़ गया |

“ओह पशु भी इतना समझदार होता है और मुर्ख मनुष्य आपस में लड़ते है” शिकारी यह मन ही मन में बडबडाया और बिना किसी का शिकार किये वह अपने घर लौट आया और उसी दिन से उसने शिकार करना छोड़ दिया |

शिक्षा :- अच्छी सीख अपने छोटो से मिले या फिर जीव जन्तुओ से ग्रहण करनी चाहिए | 


2.कछुआ गुरु (Hindi Moral Stories)

एक बूढ़े आदमी थे,वह गंगा किनारे एक छोटी सी झोपडी में रहते थे झोपडी में ही एक गढ्ढा बना हुआ था जिसमे उन्होंने एक कछुआ पाला हुआ था| वह पास की ही बस्ती में से खाने को कुछ मांग लाते थे और कुछ चने मांग लाते थे और उन्ही चनो को भिगोकर वह कछुए को दिया करते थे|

एक दिन एक मुसाफिर गंगा किनारे घूमते घूमते उन बूढ़े व्यक्ति की झोपडी के पास आया और बोला “कोई है भीतर”?

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अंदर से आवाज आई “अरे भाई कौन है भीतर ही आ जाओ” और वह व्यक्ति अंदर आ गया,अंदर आकर उस मुसाफिर ने बूढ़े व्यक्ति की झोपडी को देखा तभी उसकी नजर कछुए पर गई | वहकछुए को देखकर बोला “छिः आपने यह कैसा गन्दा जीव पाल रखा है”?

बूढ़े बाबा उसकी यह बात सुनकर उस पर क्रोधित हो गये और बोले “तुम मेरे गुरु बाबा का अपमान करते हो निकल जाओ मेरी कुटिया से अभी के अभी”| उस मुसाफिर को बाबा का यह जवाब अच्छा तो नही लगा लेकिन उसके मन में एक सवाल उत्पन्न हो गया कि यह कछुआ किसी का गुरु कैसे हो सकता है ?

उस मुसाफिर ने विनम्र भाव से बाबा से कहा “बाबा माफ़ कीजियेगा मैंने बिना जाने यह बात यह दी लेकिन मै यह जानने को उत्सुक हूँ की यह छोटा सा कछुआ आपका गुरु कैसे हो सकता है “?

मुसाफिर के विनम्रता से पूछने पर बुजुर्ग व्यक्ति कुछ शांत हुआ और बोला “यदि जानना चाहते हो तो सुनो” ‘तुम देखते नही की तनिक सी आहट पाकर या किसी के साधारण स्पर्श से यह अपने सब अंग भीतर खींचकर कैसे गुड़ीमुड़ी ह जाते है चाहे फिर जितना हिलाओ डुलाओ कुछ भी हरकत नही करते ‘|

व्यक्ति ने पूछा “बाबा इसका क्या अर्थ है”?

बाबा ने उत्तर दिया क्यों नही हो सकता “मनुष्य भी इसी प्रकार सावधान रहना चाहिए, लोभ-लालच से दूर रहकर हमेशा राम राम ! करते रहना चाहिए इनकी तरह मनुष्य को भी लोभ और लालच से दूर अपने घर में या फिर अपने मन को अपने वश में कर लेना चाहिए |

वह व्यक्ति सब समझ गया लेकिन फिर भी बोला “आपकी सभी बाते ठीक है लेकिन बाबा यह बहुत नीच जीवो की श्रेणी में आता है” | तो बाबा झट से बोले “सही कहा अपने लाभ के लिए व्यक्ति नीच से नीच व्यक्ति से भी संबंध बना लेता है”| यह बात सुनकर वह मुसाफिर सब समझ गया और बाबा से विदा लेकर अपने सफ़र पर निकल गया |

शिक्षा :- मनुष्य अपने लाभ के लिए नीच व्यक्ति और वस्तु से भी संबंध रख लेता है |


3.नरक की यात्रा (Hindi Moral Stories)

“यह तो बड़ा ही भयानक दृश्य है” | धर्मराज युधिष्ठिर को यमराज के दूत नरक दिखला रहे थे,क्योकि धर्मराज युधिष्ठिर ने एक बार आधा झूठ बोला था कि “अश्वत्थामा मारा गया,मनुष्य नही हाथी”| सत्य को इस प्रकार घुमा फिरा के बोलने के कारण उन्हें यमराज के आदेशानुसार नरक को केवल एक बार देखना था |

उन्होंने अनेक नरक देखे कहीं किसी को सर्प-बिच्छु काट रहे थे,तो कही किसी को जीते-जी कुत्ते काट रहे थे और सियार और गिद्ध नोच रहे थे| कोई व्यक्ति आरे से चीरा जा रहा था तो किसी को तेल में उबाला जा रहा था | एस प्रकार अनेक प्रकार के पापियों को उनके कर्मो से अनुसार कठोर दंड और यातनाये दी जा रही थी |

धर्मराज युधिष्ठिर दूतो से बोले “यह तो बड़े भयंकर दंड है कौन से मनुष्य यह दंड पाते है?

दूत ने नम्रता से कहा “हाँ महाराज ! यह बहुत भयंकर दंड है यहाँ वह सभी मनुष्य आते है जो जीवो को मारते है उनका मांस खाते है,दुसरो का हक छीनते है तथा बड़े पाप करते है |”

लोग हाय हाय ! कर रहे थे चिल्ला रहे थे लेकिन धर्मराज युधिष्ठिर के वहां पहुँचने से उनके कष्ट कम हो गये पीड़ा कम हो गई वह सभी लोग धर्मराज युधिष्ठिर से कहने लगे महाराज आप महान है आप यहीं रुक जाइये | उनकी बात सुनकर धर्मराज युधिष्ठिर वहीं रुक गये |

तब स्वयं यमराज और इंद्र देव वहां आये और उन्हें समझाया महाराज आप इन पापियों की छल भरी बातो में न आये यह सभी अत्यंत पापी है और इन्हें इनके कर्मो की सजा मिल रही है आप यहाँ रूककर इनके पापो में इनका साथ दे रहे है|

जो मनुष्य जीवो पर दया नही करते,उलटे दुसरो को पीड़ा देते है,पाप करते है और झूठ बोलते है वही लोग इस नरक में आते है |

धर्मराज युधिष्ठिर सब समझ गये और अपने बोले गये झूठ के कारण जो उन्होंने पाप किये थे नरक के दृश्य देखकर उनका वह पाप भी समाप्त हो गया था | अब उन्हें लेने के लिए स्वर्ग से एक स्वर्ण विमान आया और उन्हें लेकर आने साथ स्वर्ग की ओर रवाना हो गया |

शिक्षा :- मनुष्य कई पाप करता है जिसका फल उसे नरक में भोगना ही पड़ता है |


4.तुम मनुष्य हो या पशु (Moral Stories in Hindi)

एक सच्ची घंटना है नाम मै नही बताऊंगा | बहुत से लडके पाठशाला से निकले,पढाई के बीच में दोपहर की छुट्टी हो गई थी | सभी बच्चे हँसते कूदते मस्ती में चिल्लाते हुए चले जा रहे थे | पाठशाला के सामने एक व्यक्ति लेता हुआ था किसी भी बालक का उसपर ध्यान नही गया|

एक लडके ने उसे देखा,वह उसके पास गया वह आदमी बीमार था | उस बीमार व्यक्ति ने बच्चे से पानी माँगा बच्चा भाग कर अपने बस्ते में से अपनी बोतल निकाल लाया और उस बीमार व्यक्ति को उस बोतल से पानी पिलाया | पानी पीकर वह आदमी फिर से वहीं लेट गया उसे लेता देख वह बच्चा भी खेलने में लग गया |

बच्चा शाम को पाठशाला से घर लौटा तो उसने देखा कि उसके पिता किसी सज्जन से बात कर रहे है वह सज्जन उसके पिता को बता रहा था की “आज पाठशाला के सामने दोपहर में सडक पर एक व्यक्ति मर गया”|

यह बात सुनकर लड़का पिता के पास गया और बोला ‘बाबु जी ! वह सड़क पर पढ़ा था,उसके पानी मांगने पर मैंने उसे अपने पास से लाकर पानी भी पिलाया और बाद में मै वहां से चला गया’|

यह बात सुनकर उसके पिता उसपर बहुत नाराज हुए और उससे बोले “नालायक यह तुमने कितनी बड़ी गलती की एक बीमार आदमी को तुम देखकर छोड़ आये”| ‘तुमने उसे अस्पताल क्यूँ नही पहुँचाया’ ? उपचार के अभाव में उस व्यक्ति के प्राण चले गये |

डरता डरता बालक बोला “मुझे माफ़ करदो बाबु जी मै अकेला था भला मै उसे लेकर अस्पताल कैसे जाता”?

पिता ने उसे फिर से डांटते हुए कहा “बहाने मत बनाओ” ‘तुम नही ले जा सकते थे तो जाकर अध्यापक से बताते या फिर घर आकर मुझे बताते मै उसके लिए प्रबंध करता’ |

तुम्हे नही पता तुमने कितनी बड़ी भूल की है एक रोगी,लाचार व्यक्ति को बीमार देखकर भी तुमने उसकी मदद नही की,अगर तुमने उसकी मदद की होती तो आज उसके प्राण बच सकते थे| लेकिन तुम्हारी छोटी सी भूल ने क्या कर दिया |

तुम मेरी नजरो से दूर हो जाओ और सोचना की आखिर “तुम मनुष्य हो या फिर पशु”|

शिक्षा :- हमे सदा जरुरतमंद की सहायता करनी चाहिए |


 5.संतोष का फल (Moral Stories in Hindi)

एक ऐसा समय था जब देश में अकाल पड़ा था,लोग भूखे मर रहे थे| एक छोटे से नगर में एक धनी पुरुष थे वह बहुत ही दयालु थे | उन्होंने प्रतिदिन हर छोटे बच्चे को एक रोटी देने की घोषणा कर दी | दूसरे दिन सवेरे एक बगीचे में सब बच्चे इकट्ठे हो गये और लाइन में खड़े हो गये और धनी व्यक्ति के नौकरों ने रोटी बाटनी शुरू कर दी |

रोटियां छोटी बड़ी थी,सब बच्चे एक दुसरे को धक्का देकर बड़ी रोटी पाने का प्रयत्न कर रहे थे और आपस में झगड़ रहे थे | केवल एक छोटी लड़की एक ओर चुपचाप खड़ी थी| अंत में जब वह आगे बढ़ी तो टोकरी की सारी रोटियां खत्म हो चुकी थी केवल एक छोटी रोटी बची थी| उस छोटी बच्ची ने उस रोटी को लिया और पप्रसन्नता से अपने घर चली आई |

दुसरे दिन फिर से एक बार रोटी बांटी गई और आज भी उसे छोटी रोटी ही मिली| आज भी लड़की ख़ुशी ख़ुशी रोटी लेकर घर आ गई और घर आकर रोटी खाने के लिए जैसे ही उसने रोटी तोड़ी तो ‘उसमे से एक “सोने की मुहर”  निकली’| लड़की ने उस मोहर को माँ को दिखाया |

उसकी माँ बोली “बेटी यह तो सोने की मोहर है जाओ इसे उन धनी आदमी को लौटा आओ”| वो बहुत दयालु है ऐसी परिस्थिति में भी वो हम गरीबो के लिए इतना कर रहे है वो तो भगवान समान है |

लडकी ने मोहर ली और दौड़कर धनी व्यक्ति के घर की ओर जाने लगी | धनी व्यक्ति के पास पहुँच कर उसने वो मोहर उसे देदी तो धनी व्यक्ति ने पूछा “यह तुम्हे कहाँ से मिली “?

लड़की ने जवाब दिया “आज सवेरे जब मै रोटी लेकर घर गई तो रोटी में से यह मोहर निकली”| माँ ने कहा शायद यह आपके आते में गिर गई होगी इसे उन धनी व्यक्ति को डे आओ इसलिए मै इसे आपको वापस करने आई हूँ |

धनी व्यक्ति उस छोटी बच्ची की बात से खुश हो गया और बोला “नही यह मेरी नही है यह तुम्हारे संतोष का फल है ले जाओ इसे”|

तो उस बच्ची ने एक टक उत्तर दिया “लेकिन मुझे तो मेरे संतोष का फल मिल गया मुझे लाइन में धक्का नही खाना पड़ा” |

इस जवाब को सुनकर वह धनी व्यक्ति बहुत खुश हो गया उसने उसे अपनी धर्मपुत्री बना लिया और उसकी माँ को अपने महल में रहने को जगह दे दी| आगे चलकर उस व्यक्ति ने उस बच्ची को अपना उतराधिकारी घोषित कर दिया और अपनी सारी धन दौलत उसके नाम कर दी |

शिक्षा :- संतोष का फल मीठा होता है | 

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