Luv Kush ki Katha – दो वीर बालक जिन्होंने पकड़ा प्रभु राम के अश्वमेध यज्ञ का घोडा

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जब राम लंका के राजा रावण का वध करके सीता और लक्ष्मण संग अयोध्या लौटे तो सभी बहुत प्रसन्न थे प्रजा ने भी उनका खूब स्वागत किया | धूमधाम से उनका राजतिलक हुआ और प्रभु राम राजा बन गये | Luv Kush ki Katha उनके राज्य में प्रजा जन बहुत सुखी थी | 

लेकिन समय के साथ साथ प्रजा में राम और सीता को लेकर अफवाहे फैलने लगी | राम को यह बिलकुल सहन नही हुआ कि उनपर या फिर रघुकुल पर कोई भी ऊँगली उठाये,इसलिए उन्होंने माता सीता को त्यागने का निश्चय कर लिया | उन्होंने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को आदेश दिया की वह सीता माता को जंगल में कही दूर छोड़ आये | लक्ष्मण बड़े भाई और अयोध्या के राजा की बात कैसे टाल सकते थे उन्होंने वैसा ही किया |

वन में माता सीता महर्षि बाल्मीकि के आश्रम में रहने लगी और वहां उन्होंने दो जुड़वाँ बालको को जन्म दिया | महर्षि ने बड़े का नाम लव और छोटे का कुश रखा | महर्षि बाल्मीकि की देखरेख में ही दोनों बड़े हुए दोनों बहुत वीर और साहसी थे | महर्षि बाल्मीकि ने उन्हें शस्त्र और शास्त्र दोनों की उत्तम शिक्षा दी | दोनों बालक समय के साथ शस्त्र और शास्त्र दोनों में निपुण हो गये |

उधर दूसरी तरफ अयोध्या में Luv Kush ki Katha  अश्वमेध यज्ञ करने की तैयारी हो रही थी | अश्वमेध यज्ञ के बाद एक घोडा छोड़ दिया गया और उसपर एक सन्देश लिख दिया गया की यह घोडा अयोध्या नरेश प्रभु श्री राम के अश्वमेध यज्ञ का घोडा है जो भी व्यक्ति राज्य इसके आगे सिर झुकाएगा उसे प्रभु श्री राम का सानिध्य प्राप्त होगा |

और जो भी व्यक्ति या राज्य इसे पकड़ेगा उसे अयोध्या नरेश श्री राम की चक्रवर्ती सेना से युद्ध करना होगा | आस पास के कई राजाओ ने उसके सामने सिर झुका दिया |

एक दिन लव कुश को अपने आश्रम के निकट एक घोडा दिखा वह बहुत सुन्दर रेशमी वस्त्रो से सुसज्जित था मानो स्वर्ग से उतरा हो | उसे देख कर लव कुश ने उसे पकड़ लिया और उसपर लिखे सन्देश को युद्ध की चुनौती समझ कर उस घोड़े को पकड़ कर अपने आश्रम में रख लिया |

बालको को घोडा ले जाते देख घोड़े की सुरक्षा में लगे सैनिको ने बालको से कहा “बालको यह अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र का अश्वमेध यज्ञ का घोडा है इसे छोड़ दो और जाने दो|”

लव कुश ने जवाब दिया “हम यह घोडा नही छोड़ेगे”| सैनिको ने बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन सब हर गये अंत में दोनों की बीच झडप हुई और सैनिको को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा | 

सैनिको ने जाकर सारी बात भरत,लक्ष्मण और शत्रुघ्न को बताई | Luv Kush ki Katha तभी भरत,लक्ष्मण और शत्रुघ्न सभी ने आकर बालको को समझाया लेकिन वह दोनों अपनी बात पर अडिग रहे | बालको ने कहा “हमे राजा श्री राम की चुनौती स्वीकार है हम अब युद्ध के बाद ही घोडा वापस करेंगे |

अंत में नौबत युद्ध की आ गई | एक तरफ भरत,लक्ष्मण,शत्रुघ्न,सुग्रीव,जामवंत,अंगद बलवान और महाबली हनुमान थे वहीं दूसरी तरफ केवल दो नन्हे बालक लव और कुश | दोनों तरफ से घमासान युद्ध हुआ भरत,लक्ष्मण और महाबली हनुमान सहित सभी वीर पराजित हो गये और मूर्छित होकर धरा पर गिर गये |

जब यह सारा वृतांत प्रभु श्री राम को सुनाया गया तो अपनी हार सुनकर श्री राम को स्वयं आना पड़ा | दूसरी तरफ श्री राम यह जानने के लिए भी उत्सुक थे की अयोध्या की चक्रवर्ती सेना पर एक से बढ़कर एक वीरो को पराजित करने वाले आखिर वो दो बालक कौन है,उनके माता पिता कौन है ?

 लव कुश में रणभूमि में श्री राम को भी ललकारा लेकिन श्री राम की विनम्रता देख दोनों ने अपना परिचय दिया और बोले “मै लव और यह मेरा अनुज कुश है हम दोनों महर्षि बाल्मीकि के शिष्य है और हमारी माता का नाम वनदेवी है”|

इसी बीच रणभूमि में माता सीता और महर्षि बाल्मीकि भी आ गये रणभूमि में पिता पुत्र को देख महर्षि बोले “आज मेरी रामायण पूरी हुई पुत्रो यह तुम्हारे पिता अयोध्या नरेश श्री राम है आगे बढ़कर इनके चरणों को नमन करो”|

लव कुश ने चरण वंदना की और आशीर्वाद ग्रहण किया | प्रभु राम ने भी दोनों बालको को अपने ह्रदय से लगा लिया | बाल्मीकि ने माता सीता को अपनाने की बात कही तो राम ने सीता से उनके निर्दोष होने का प्रमाण मंगा जिन अफवाहों के चलते माता सीता का त्याग किया था |

श्री राम की इस बात से माता सीता बहुत आहत हुई और इस बात को सहन न कर सकी Luv Kush ki Katha और क्रोध में आकर धरती माँ से बोली “हे धरती माँ अगर मैंने मन,वचन और कर्म से अपने पति श्री राम के अतिरिक्त किसी भी पर पुरुष का ध्यान भी न किया हो तो हे माँ मुझे अपनी गोद में स्थान दे”|

इतना कहते ही जोरो से बिजली कडकने लगी आंधी तूफ़ान आने लगी धरती हिलने लगी तबी एक जोर का विस्फोट हुआ और धरती फट गई और माता सीता उसमे समां गई | यह देख श्री राम सीता को रोकने के लिए दौड़े लेकिन तब तक देर हो चुकी थी धरती फिर से सामान्य हो गई चारो तरफ चीख पुकार शुरू हो गई | लोगो को अपनी गलती का एहसास हुआ लेकिन अब सब बेकार था |

श्री राम अब अपने दोनों बालक को लेकर अयोध्या लौट आये उनके बड़े होने पर आधा आधा राज्य बाँट कर उन्होंने भी जल समाधी ले ली | लव और कुश दोनों ने अपने पिता श्री राम की ही तरह प्रजाजन का खूब ध्यान रखा | 

“रघुकुल रीत सदा चली आई,प्राण जाये पर वचन न जाई “

“जय श्री राम”

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