Imandar Vyapari ki Kahani – ईमानदार व्यापारी की कहानी

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Imandar Vyapari ki Kahani
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यह कहानी एक ईमानदार व्यापारी और एक यूरोपियन व्यक्ति की है जिसमे व्यक्ति काली मिर्च उस व्यापारी को बेच देता है और बेचने के बाद व्यापारी उस काली मिर्च को बढे हुए दाम पर बेचता है तो आखिर कहानी क्या है चलिए विस्तार से जानते है Imandar Vyapari ki Kahani

Imandar Vyapari ki Kahani – ईमानदार व्यापारी की कहानी

कोलकाता में किराने का सामान का थोक व्यापार करने वाला एक व्यापारी रहता था। उसका नाम रामदुलार था, रामदुलार के पिता पहले गरीब थे। बचपन में ही रामदुलार के पिता परलोक चले गए थे। बड़े कष्ट और परिश्रम का जीवन बिता कर रामदुलार ने धन कमाया और व्यापार जमाया था। रामदुलार व्यापार में बहुत ईमानदार और दयालु था।

एक बार काली मिर्च का भाव बहुत घट गया रामदुलार के पास बहुत से बोरे काली मिर्च थी किंतु उसने घटे भाव होने के बाद भी कलि मिर्च घटे भाव से बेचीं। उन्हीं दिनों एक यूरोपियन उसके पास आया उसने रामदुलार से कहा- “मेरे पास बहुत काली मिर्च है। क्या तुम मेरे कुछ काली मिर्च के बोरे अपने पास रख कर मुझे थोड़े रुपए उधार दोगे? मुझे इस समय रुपयों की बहुत आवश्यकता है।” Imandar Vyapari ki Kahani

रामदुलार ने कहा- “मैं बोरे रखकर उधार रुपए देने का काम नहीं करता। आप चाहे तो मैं आपके बोरे खरीद कर उसके दाम दे सकता हूं। यूरोपियन ने समझा कि काली मिर्च का भाव बढ़ने की संभावना है इसी से वह व्यापारी आज के घटे भाव में बोरे खरीदने को कह रहा है।

लेकिन उसे रुपयों की आवश्यकता थी वह बोला- “जब तुम मेरे बोरे रखकर उधार रुपए नहीं देते तो उन्हें खरीद ही लो मेरा काम रुपयों के बिना नहीं चल सकता। रामदुलार ने उसकी मिर्च के बोरे खरीद लिए और दाम दे दिए दो-तीन दिन बाद काली मिर्च का भाव बढ़ गया। रामदुलार ने बढे भाव में अपनी काली मिर्च और उस यूरोपियन व्यापारी से खरीदी काली मिर्च भी बेच दी। उसे खूब लाभ हुआ।

उस यूरोपियन को फिर रुपयों की आवश्यकता हुई बचे हुए काली मिर्च के बोरे लेकर फिर रामदुलार के पास आया रामदुलार उसे देखते ही कहने लगा- “साहब ! मैं आपका रास्ता ही देख रहा था। आप क्या फिर मिर्ची बेचेंगे, यूरोपियन बोला- “हां ! मुझे पैसो की आवश्यकता है तुम कृपा करके मेरे यह बोरे भी खरीद लो।

Imandar Vyapari ki Kahani रामदुलार बोरो की काली मिर्च तोल कर और हिसाब करके रुपए यूरोपियन को दे देता है दूसरी तरफ यूरोपियन को पता नहीं था कि काली मिर्च का भाव बढ़ गया है।

उसने रुपए गिने और आश्चर्य से कहा- “तुम अपना हिसाब फिर देखो तुमने मुझे बहुत अधिक रुपए दिए हैं।  रामदुलार ने कहा- “हिसाब में भूल नहीं है आपको पता नहीं है कि काली मिर्च का भाव बढ़ गया है किंतु आपके अनजाने से मैं आपका लाभ उठाऊँ यह बेईमानी है मैं आपको धोखा नहीं देना चाहता।

यूरोपियन ने काली मिर्च का भाव पूछा और कागज पेंसिल लेकर हिसाब करने लगा। उसने रुपए गिने और कहा- “तुमने अपने हिसाब में अवश्य भूल की है रुपए बहुत अधिक हैं। रामदुलार ने फिर कहा- “रुपए अधिक नहीं है हिसाब में भूल भी नहीं है।” पहली बार आप जब मुझे काली मिर्च दे गए थे तो भाव कम था पीछे भाव बढ़ गया और मैंने बढे भाव से जब मिर्च बेच दी और मुझे अधिक लाभ हुआ।

उस दिन आप मिर्च बेचने नहीं आए थे, रुपयों की आवश्यकता से विवश होकर आपको काली मिर्च बेचनी पड़ी थी। आप की विवशता से यदि मैं लाभ उठा हूं तो यह में यह बेईमानी और निर्दयता होगी। उस मिर्च में भाव बढ़ने पर जो रुपए अधिक आए वह आपके ही हैं, मैं उन्हें ही आपको दे रहा हूं Imandar Vyapari ki Kahani वह रुपए लौटाने के लिए कई दिन से मैं आपका पता लगा रहा था। यूरोपियन रामदुलार की ईमानदारी देखकर आश्चर्य में पड़ कर बोला- “भारतीय व्यापारी ऐसा ईमानदार होता है कभी सोचा नहीं था।”

 

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