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Ekta Mein Bal Hai – एकता में बल है – Hindi Moral Stories

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Ekta Mein Bal Hai
Ekta Mein Bal Hai
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दोस्तों ! आज मैं आपके लिए एक और नई कहानी लेकर आया हूँ जिसे पढकर आपको सीख मिलेगी कि हमे सदा अपनों के साथ मिलकर रहना चाहिए और अपनों से कभी झगड़ना नही चाहिए| आज की कहानी आपने हो सकता है पहले भी सुनी हो| आज की कहानी का शीर्षक है Ekta Mein Bal Hai – एकता में बल है शीर्षक से ही आपको कहानी के बारे में कुछ न कुछ एहसास हो गया होगा| तो चलिए बढ़ते है कहानी की तरफ और विस्तार से कहानी के बारे में जानते है :-

Ekta Mein Bal Hai – एकता में बल है – Hindi Moral Stories

मातादीन एक गरीब किसान था उसके पाँच पुत्र थे ,शिवराम, शिवदास, शिवलाल, शिवसहाय और शिवपूजन| यह पांचो लड़के आपस में बहुत झगड़ा करते थे| छोटी छोटी बातो पर तू-तू और मैं-मैं हो जाती थी और कभी कभी तो गुथंगुथी भी हो जाती थी|

मातादीन अपने लडको के झगड़ो को लेकर परेशान हो गया था और एक दिन उन सभी को समझाने के विचार से अपने पास बुलाया| सबसे छोटे लडके को पास बुलाया और बोला जा बाहर से जाकर कुछ लकड़ियाँ लेकर आ| छोटा लड़का भागकर गया और लकड़ियों चुनकर ले आया| अब मातादीन  ने बड़े लड़के से कहा इन सभी को इकठ्ठा करके एक गठ्ठर बना लो|

बड़े लड़के ने झट से एक रस्सी से सभी लकडियो को बांध दिया|अब किसान बोला- ‘तुममे से जो इस गठ्ठर को तोड़ देगा उसे मैं  मुँह माँगा ईनाम दूंगा|’ लेकिन सबसे पहले छोटे बेटे को तोड़ने के लिए आदेश दिया और बोला सबसे छोटे भाई को तोड़ने दो|

शिवपूजन ने गठ्ठर को उठाया और जोर लगाना शुरू कर दिया| दांतों को दबाकर,आँखों को मीचकर,सिर से पैरो तक वह पसीने से लथपथ हो चूका था बहुत जोर लगाने के बाद भी वह गठ्ठर  की एक भी लकड़ी को नही तोड़ सका|अब उससे बड़े बेटे अर्थात शिवसहाय को गठ्ठर दिया गया उसने भी बहुत जोर लगाया लेकिन वह भी गठ्ठर की एक भी लकड़ी को न तोड़ सका| Ekta Mein Bal Hai

इस प्रकार बारी बारी से सभी लडको ने गठ्ठर को तोड़ने का प्रयास किया लेकिन कोई भी गठ्ठर  को तोड़ न सका|सबके हार मानने के बाद जब सारे थक गये और अपनी हार मंजूर कर ली कि हमसे यह गठ्ठर नही टूटेगा|

तब मातादीन ने बड़े बेटे से कहा- बेटा शिवराम ! ‘जरा गठ्ठर को खोलकर सभी को एक एक लकड़ी दे दो और तुम भी एक लकड़ी लेलो|’

शिवराम ने आदेश को मानते हुए गठ्ठर को खोल दिया और एक एक लकड़ी सभी को दे दी| अब किसान ने सभी को आदेश दिया की बेटा अब सभी लोग अपनी अपनी लकड़ी तोड़ दो| आदेश को मानते हुए सभी ने अपनी अपनी लकड़ी को पटापट तोड़ दिया|

अब मातादीन ने कहा-देखो, ‘यह सभी लकड़ियाँ जबतक एक साथ थी तुममे से कोई भी  उन्हें तोड़ नही सका और जब ये अलग अलग हो गयी सभी ने कितनी सरलता से उन्हें तोड़ दिया|’  Ekta Mein Bal Hai

ठीक इसी प्रकार से यदि तुम सभी लोग इसी तरह से लड़ते और झगड़ते रहोगे तो दुसरे लोग तुम्हे तंग करेंगे और तुम्हे कमजोर करेंगे|और यदि तुम सभी लोग मिल जुलकर रहोगे तो कोई भी तुमसे शत्रुता करने का साहस भी नही करेगा|

पिता की बात सभी लडको को समझ आ गई और उन सभी ने किसान से वादा किया और बोला – ‘पिता जी ! हम आपको वचन देते है हम आज से आपस में कभी नही लड़ेंगे और आपस में सभी लोग मिल जुलकर रहेंगे |’

शिक्षा :- एकता में बल होता है| इसलिए हमे सदा मिलकर रहना चाहिए|

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