Budhiman Lomdi ki kahani – कौए और बुद्धिमान लोमड़ी की कहानी

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Budhiman Lomdi ki kahani
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दोस्तों कैसे है आप सब आशा करता हूँ कि आप सभी बहुत अच्छे होंगे| आज मै आपके लिए एक और नई कहानी लेकर आ गया हूँ जो की कौए और लोमड़ी की है| इस कहानी में एक कौए अपनी पत्नी के साथ एक पेड़ पर रह रहा होता है और कौवी अंडे देती है जिसमे से कुछ दिनों बाद बच्चें निकलते है लेकिन एक सांप जो कौवे के बच्चों को खा जाता है तो वह लोमड़ी से मदद मांगने जाते है तो आखिर बुद्धिमान लोमड़ी Budhiman Lomdi ki kahani ने उस कौए की मदद कैसे की तो चलिए जानते है कहानी में :-

Budhiman Lomdi ki kahani – कौए और बुद्धिमान लोमड़ी की कहानी

एक पीपल के पेड़ पर एक कौवा और कौवी रहते थे और अपनी जिंदगी बड़ी मौज से बिता रहे थे। एक दिन अपने घोंसले में कौवी ने अंडे दिए, कुछ दिन बाद उनमें से छोटे-छोटे बच्चे अपने छोटे पर ताने हुए निकल आए। कौवा और कौवी बहुत खुश थे। दोनों दिन में अपने बच्चों को छोड़कर घोसले में उनके लिए दाना चुग कर लाने के लिए उड़ गए।

उसी पेड़ के नीचे एक काला सांप रहता था। उसने बच्चों को देखा और उन्हें खाने के विचार से पेड़ पर चढ़ गया घोसले में पहुंचकर वह छोटे-छोटे कौवे के  बच्चों को खा गया। जब कौवा और कौवी शाम को वापस घोसले में आए तो बच्चों का कुछ पता नहीं था, बेचारे बड़े दुखी हुए पर  उनके पास कोई और चारा नहीं था।

कुछ दिन बाद कौवी ने फिर अंडे दिए। अंडों में से पहले की तरह फिर से बच्चे निकल आए। कौवा और कौवी बड़े प्यार से अपने बच्चों का पालन पोषण करने लगे।एक दिन कौवा और कौवी अपने बच्चों के लिए खाना लेने गए हुए थे तभी वह काला सांप पेड़ पर फिर चढ़ गया और बच्चों को मारकर खा गया। Budhiman Lomdi ki kahani

कौवा और कौवी ने लौटकर बच्चों को घोसले में नहीं पाया वह इस बार भी पहले की भांति बहुत दुखी थे। कुछ दिन बाद कौवी ने फिर अंडे दिए और उनमें से बच्चे निकले लेकिन इस बार कौवा कौवी बहुत सतर्क थे। हर समय बच्चों के पास एक ना एक जरूर रहता था।

किंतु एक दिन जब कौवा दाना लेने के लिए गया हुआ था तो वह बच्चों की देखभाल के लिए कौवी को घोसले में ही छोड़ कर गया था।

लेकिन हर बार की तरह फिर एक बार काला सांप पेड़ पर चढ़ आया और कौवी के लाख बचाने की कोशिश के बाद भी वह बच्चों को खा गया और फिर अपने बिल में चला गया। 

इधर कौवी का रो रो कर बुरा हाल था, शाम को जब कौवा वापस घोसले में लौटा तो कौवी को रोता और दुखी पाया। कौवी ने सारी घटना का विवरण कौवे को सुनाया। साथ ही यह कहा कि अब हम इस पेड़ पर नहीं रहेंगे।

कौवा समझदार था उसने सोच विचार कर इस सांप से बदला लेने के लिए एक युक्ति सोची और वह सहायता के लिए लोमड़ी मौसी के पास गया।दोनों ने लोमड़ी के पास जाकर कहा- ” लोमड़ी मौसी हम पर बड़ा संकट आन पड़ा है आप हमारी सहायता करो अन्यथा हमें अपना घर छोड़कर जाना पड़ेगा।” Budhiman Lomdi ki kahani

लोमड़ी ने कहा-” क्या बात है कौवे भाई।” कौवे सारी बात लोमड़ी को बताई।

लोमड़ी बोली तुम लोगों को घर छोड़ने की आवश्यकता नहीं है मैंने सांप को मारने के लिए एक युक्ति निकाली है। कल प्रातः राज महल में नौकरानी राजकुमारी संग नहाने के लिए जाएंगी। वह अपने कपड़े एवं गहने उतार कर रखेंगे आप वहां पर उसी समय उड़कर पहुंच जाना और मौका देख कर राजकुमारी का हार लेकर उड़ जाना।

लोमड़ी ने कौवी को समझाया जब कौवा हार लेकर उड़ जाएगा तो उसे जोर जोर से कांव-कांव कर शोर मचाना है जिससे नौकरों का ध्यान कौवे की तरफ जाए और कौवे से कहा कि वह राजकुमारी के हार को लेकर सांप के बिल डाल देगा और वहां से उड़ जाएगा।

कौवे को यह युक्ति पसंद आई दूसरे दिन प्रातः कौवा पेड़ पर जाकर बैठ गया और राजकुमारी पर नजर रखने लगा जैसे ही राजकुमारी ने अपना मोतियों का हार उतार कर रखा, कौवा उड़ कर आया और राजकुमारी का हार लेकर उड़ गया,दूसरी तरफ कौवी ने कांव-कांव कर शोर मचाना शुरू कर दिया।  नौकरों ने देखा तो कौवे के पीछे भागने लगे।

कौवा तेजी से उड़कर उसी पेड़ के पास पहुंचा जिस पेड़ के नीचे बिल में वह काला सांप रहता था ठीक उसी के बिल में राजकुमारी के हार को डालकर कौवा पेड़ पर बैठ गया।

बिल में हार गिरने की आवाज से सांप बाहर निकल आया और फुंकार मारने लगा। नौकरों के हाथों में डंडे और भाले थे, नौकरों ने आव देखा ना ताव डंडो की बारिश उस काले सांप पर कर दी डंडे की चोट से सांप मर गया और नौकर हार को लेकर चले गए। Budhiman Lomdi ki kahani

सांप को मरा हुआ देखकर कौवा और कौवी बहुत खुश हुए और कांव-कांव करते हुए लोमड़ी मौसी की प्रशंसा कर अब उन्हें अपना घर छोड़कर कहीं जाने की जरूरत नहीं थी वह फिर से चैन से उसी पेड़ पर घोंसला बनाकर रहने लगे कुछ दिनों बाद कौवी ने फिर से अंडे दिए अंडों में से छोटे छोटे प्यारे प्यारे कौवे के बच्चे निकले और सभी खुशी-खुशी अपने परिवार के साथ रहने लगे।

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