Batuni Kachhuya ki Kahani – बातूनी कछुए की कहानी –

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Batuni Kachhuya ki Kahani
Batuni Kachhuya ki Kahani
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वैसे तो कहानियां मनोरंजन के लिए होती है लेकिन कभी कभी कहानियो के माध्यम से ही हमे बहुत कुछ सिखने को मिलता है और कहानियां हमारा मार्गदर्शन भी करती है| कुछ इसी प्रकार से आज मैं आपको एक ऐसी ही कहानी सुनाने जा रहा हूँ जहाँ एक कछुए की दोस्ती बगुलों के साथ थी और वह तीनो बड़े ही प्रेम से रहते थे लेकिन अपने ज्यादा बोलने के कारण Batuni Kachhuya ki Kahani कुछ ऐसा हुआ की कछुए को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा तो आखिर क्या हुआ था चलिए जानते है :-

Batuni Kachhuya ki Kahani – बातूनी कछुए की कहानी 

एक तालाब में एक कछुआ रहता था कछुए के दो बगुले मित्र थे यह तीनों मिलकर गपशप किया करते थे। एक बार वर्षा ना होने के कारण भयंकर सूखा पड़ा तालाब, नदी, नाले सभी सूखा पड़ने के कारण सूख गए। पशु पक्षी जल की तलाश में इधर-उधर भागते दिखाई देने लगे। बगुले ने भी कोई ऐसी जगह जहां पानी हो वहां जाने का मन बना लिया।

जाने से पहले बगुले अपने मित्र कछुए के पास गए और अपने जाने का कार्यक्रम बताया। कछुए ने यह बात सुनकर कहा जाना तो मैं भी चाहता हूं किंतु क्या करूं मैं तो उड़ नहीं सकता। बगुलों ने कहा-” यह बात तो ठीक है हम तुम्हें यहां अकेला छोड़कर नहीं जाना चाहते किंतु क्या करें कुछ समझ में नहीं आता तुम ही कोई युक्ति बताओ।”

कछुए ने कहा-” मेरे पास एक तरकीब है मैं बताता हूं यदि तुम इस प्रकार कर सको तो मैं भी तुम्हारे साथ चल सकूंगा।”  तरकीब यह है की एक लकड़ी लाओ और Batuni Kachhuya ki Kahani उसके दोनों किनारों को तुम लोग अपनी चोंच से पकड़ लो मैं बीच में लकड़ी पकड़ कर लटक जाऊंगा। इस प्रकार आसानी के साथ मैं भी तुम्हारे साथ जा सकूंगा।

बगुलों को यह तरकीब अच्छी लगी किंतु उन्होंने कहा कि तुम वादा करो कि रास्ते में अपना मुंह बिल्कुल नहीं खोलोगे। तुम ठहरे बातूनी ऐसा ना हो कि तुम बोलने के लिए मुंह खोलो और नीचे गिर जाओ नीचे गिरते ही तुम्हारी हड्डी पसली टूट जाएगी।

कछुए ने वादा किया मैं बिल्कुल नहीं बोलूंगा।

अब लकड़ी के दोनों किनारों को बगुलो  ने अपनी अपनी चोंच से पकड़ा और बीच में कछुआ  लकड़ी पकड़ कर लटक गया। बगुले ऊंचा ऊंचा उड़ रहे थे खेतों,पहाड़ों को पार करते हुए वह एक नगर के ऊपर उड़ते हुए पहुंचे। उनको देखने के लिए नीचे सड़क पर भीड़ लग गई लोग हंस रहे थे और यह तमाशा देख रहे थे। उन्होंने ऐसा तमाशा पहले कभी नहीं देखा था बच्चे तालियां पीट रहे थे चारों तरफ शोर की आवाज सुनकर कछुए को गुस्सा आ गया। और उसने कुछ कहने के लिए जैसे ही मुंह खोला और धड़ाम से नीचे गिर गया। Batuni Kachhuya ki Kahani

नीचे गिरते ही उसकी हड्डी  पसली टूट गई और बेचारा कछुआ जमीन पर गिर कर मर गया।

शिक्षा: इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि यदि आवश्यक ना हो तो हमें नहीं बोलना चाहिए।

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