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Akbar or Birbal Ke kisse – अकबर बीरबल के किस्से और कहानी

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Akbar or Birbal Ke kisse
Akbar or Birbal Ke kisse

दोस्तों हमेशा की तरह आज भी मैं आपके लिए एक मजेदार कहानी लेकर आया हूँ जिसका नाम है Akbar or Birbal Ke kisse – अकबर बीरबल के किस्से और कहानी जी हाँ आज मैं आपके लिए अकबर और बीरबल से जुडी एक कहानी लेकर आया हूँ। आज की कहानी से आपको एक सीख भी मिलेगी तो वह क्या है चलिए जानते है विस्तार से:- 

Akbar or Birbal Ke kisse – अकबर बीरबल के किस्से और कहानी

बादशाह अकबर के नौ रत्नों में से सबसे बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति थे बीरबल । बादशाह अकबर अपने राज काज की हर बात बीरबल से सलाह लेकर ही किया करते थे । साथ ही साथ बादशाह अकबर बीरबल को बहुत मानते भी थे ।

बीरबल बड़े बुद्धिमान् थे और अपनी विनोद पूर्ण बातों से बादशाह को प्रसन्न रखते थे । Akbar or Birbal Ke kisse बीरबल के पास बादशाह अकबर की हर परेशानी का हल होता था और वह हमेशा बादशाह के मन में उठ रहे सवालो के सटीक और सही जवाब देते थे। अकबर और बीरबल के विनोद की बहुत – सी बातें प्रचलित हैं । उनमें से कुछ बातें बड़े काम की हैं ।

एक घटना हम यहाँ सुना रहे हैं । एक बार बादशाह अपने राजमहल में गये । बादशाह की सबसे प्यारी बेगम उस समय अपनी किसी सखी से बातें कर रही थीं । बादशाह अचानक जाकर खड़े हो गये और वह बेगम और उसकी सहली की बातें वही खड़े होकर सुनने लगे ।  

बेगम और उनकी सहली किसी को भी बादशाह के आने की खबर नही हुई। लेकिन एक सेविका ने बादशाह को सलाम किया और कक्ष में आने का न्योता दिया तब बेगम और उनकी सहेली को बादशाह ने आने का पता चला।

Akbar or Birbal Ke kisse बेगम उठ खड़ी हुई और हँसती हुई बोलीं- ‘ आइये मूर्खराज ! ‘ अपनी सबसे प्यारी बेगम के मुख से अपने लिए मूर्खराज  सुनकर बादशाह को कुछ समझ नही आया लेकिन बादशाह को बहुत बुरा लगा ।

बेगम ने इससे पहले कभी बादशाह का अपमान नहीं किया था । बादशाह जानते थे कि बेगम बुद्धिमती हैं । वे बिना कारण के ऐसी बात नहीं कह सकतीं । लेकिन फिर भी बादशाह इस बात को लेकर गहन सोच में पड़ गये कि आज उन्हें बेगम ने मूर्खराज कहकर क्यों संबोधित किया यह तो एक बादशाह के लिए अपमानजनक है।

लेकिन बादशाह यह नहीं जान सके कि बेगप ने उन्हें मूर्खराज क्यों कहा । बेगम से पूछना बादशाह को अच्छा नहीं लगा । थोड़ी देर वहाँ रहकर वे अपने कमरे में चले आये । बादशाह उदास बैठे थे । उसी समय बीरबल उनके पास आये ।

बीरबल को देखते ही बादशाह ने बीरबल को कहा- ‘ आइये मूर्खराज ! ” बीरबल ने भी बादशाह की बात का जवाब दिया और हँसकर बोले – ‘ जी मूर्खराज जी ! ‘ बादशाह ने अब बीरबल के मुख से अपने लिए मूर्खराज सुना तो बादशाह बीरबल को आँख चढ़ाकर कहने लगे – ‘ बीरबल ! तुम मुझे मूर्खराज क्यों कहते हो यह मेरा अपमान है? Akbar or Birbal Ke kisse

बीरबल ने कहा- बादशाह सलामत ! ‘आप क्रोधित क्यों होते है मेरी बात सुनिए, मनुष्य पाँच प्रकार से मूर्ख कहलाता है । यदि दो व्यक्ति अकेले में बातें कर रहे हो और वहाँ कोई बिना बुलाये या बिना सूचना दिये जा खड़ा हो तो उसे मूर्ख कहा जाता है ।

दो व्यक्ति बातचीत कर रहे हो और उसमें तीसरा व्यक्ति बीच में पड़कर उनकी बात पूरी हुए बिना बोलने लगे तो वह भी मूर्ख कहा जाता है ।

कोई अपने से कुछ कह रहा हो तो उसकी पूरी बात सुने बिना बीच में बोलने वाला भी मूर्ख माना जाता है ।

जो बिना अपराध और बिना दोष के दूसरों को गाली दे और दोष लगाये , वह भी मूर्ख है ।

Akbar or Birbal Ke kisse इसी प्रकार जो मूर्ख के पास जाय और मूखों का संग करे , वह भी मूर्ख है । ‘ बादशाह बीरबल के उत्तर से बहुत प्रसन्न हुए।

शिक्षा: मुर्ख के प्रकार के बारे में तुम भी इन बातों को स्मरण कर लो । कभी ऐसी कोई भूल तुमसे नहीं होनी चाहिये कि लोग तुम्हें भी मूर्खराज कह सकें।

Kisan or Saras Ki Kahani – किसान और सारस की कहानी

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Kisan or Saras Ki Kahani
Kisan or Saras Ki Kahani

दोस्तों कहते है कि गलत संगत के साथ रहने मात्र से आपको भी गलत समझ लिया जाता है अब मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ यह आपको मैं आज की कहानी Kisan or Saras Ki Kahani के माध्यम से समझाऊंगा। आज की कहानी में मैं आपको बताऊंगा कैसे एक निर्दोष सारस खेती को नुकसान करने वाले पक्षियों के साथ में रहने मात्र से दोषी बन जाता है और उसकी सजा भी उसे मिलती है।

Kisan or Saras Ki Kahani किसान और सारस की कहानी

एक किसान हमेशा ही अपने खेतो में इस आस से खूब मेहनत करता था कि इस बार अच्छी फसल तैयार हो जिससे उसे अधिक से अधिक लाभ हो सके और वह अपना कर्ज चुका सके। लेकिन उसकी यह सोच अक्सर ही गलत साबित हो जाया करती थी क्योकि वह चिडियों से बहुत तंग आ गया था।

उसका खेत जंगल के पास था और जंगल में अनेक पक्षी थे। किसान जैसे ही खेत में बीज बोकर, पाटा चलाकर घर जाता, वैसे ही झुंड के झुंड पक्षी उसके खेत में आकर बैठ जाते और मिट्टी कुरेद-कुरेद कर बोये हुए बीजो को खाने लगते। Kisan or Saras Ki Kahani

किसान पक्षियों को उड़ाते-उड़ाते थक गया था। उसके बोये हुए बहुत से बीज चिडियों ने खा लिए थे, अब वह उन पक्षियों से परेशान हो चुका था। वह बार-बार बीज बोता था और हर बार पक्षी उन बीजो को कुरेद कर खा जाते थे और उसे फिर से नये बीज बोने पड़ते थे।

पक्षियों से परेशान होकर इस बार किसान शहर से एक बहुत बड़ा जाल ले आया। उसने पूरे खेत पर जाल बिछा दिया और जाल बिछा कर घर चला गया। उसने इस बार मन ही मन इन पक्षियों को सबक सिखाने के लिए पूरी तैयारी कर ली थी।

उसके घर जाते ही बहुत से पक्षी खेत से बीज चुगने आये और जाल में फंस गये। पक्षियों के साथ जाल में एक हंस भी फस गया। वह खेत में उन पक्षियों के साथ उडकर आया था और खेत में घूम रहे छोटे छोटे कीड़ो को खाने के लिए आया था। Kisan or Saras Ki Kahani

सभी पक्षी रात भर उस जाल में फंसे रहे और अगली सुबह जब किसान खेत पर आया तो उसने देखा खेत में लगाये हुए जाल में बहुत से पक्षी फंसे हुए है और उन पक्षियों के साथ एक हंस भी जाल में फंसा हुआ है। अब किसान को देख कर सभी पक्षी भयभीत हो गये।

किसान जब जाल में फंसी चिडियों को पकड़ने लगा तो सारस ने किसान से कहा-‘आप मुझपर कृपा कीजिये। मैंने आपकी कोई हानि नहीं की है। Kisan or Saras Ki Kahani

मैं न तो कोई मुर्गी हूँ, न ही बगुला और न ही बीज खाने वाला कोई पक्षी। मैं तो एक सारस हूँ। मैं तो खेत को नुकसान पहुँचाने वाला कीड़ो को खाता हूँ। कृपा कर मुझे छोड़ दे।‘

किसान अपने खेत में होने वाले नुकसान के क्रोध से भरा हुआ था। वह बोला-‘ तुम कहते तो ठीक हो लेकिन आज तुम भी इन बीज खाने वाली चिडियों के साथ पकड़े गये हो, जो मेरे खेत के बीज को खा जाया करती थी। तुम भी इन्ही के साथी हो। तुम इनके साथ आये हो तो इसका दंड भी इन्ही के साथ भोगोगे।

जो जैसो के साथ रहता है उसे वैसा ही समझा जाता है। बुरे लोगो के साथ में रहने तथा बुरा न भी करने वाले को भी बुरा ही समझा जाता है और वह भी समान दंड का अधिकारी होता है। इस प्रकार उपद्रवी चिडियों के साथ भर रहने मात्र से बेचारे हंस को भी बंधन में रहना पड़ा। Kisan or Saras Ki Kahani

Bhla Aadmi Story in Hindi – जाने कैसे हुआ एक भले आदमी का चयन

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Bhla Aadmi Story in Hindi
Bhla Aadmi Story in Hindi

दोस्तों आज की हमारी कहानी का शीर्षक है Bhla Aadmi Story in Hindi – जाने कैसे मिला एक भला आदमी? आज की कहानी में एक धनी व्यक्ति जो जब अपने कार्य के लिए एक भले आदमी की जरूरत होती है तो कैसे वह दुनिया के अनेक व्यक्तियों में से कैसे एक भले आदमी का चयन करता है तो चलिए कहानी को विस्तार से जानते है।

Bhla Aadmi Story in Hindi – जाने कैसे हुआ एक भले आदमी का चयन

एक धनी पुरुष ने एक मंदिर बनवाया। मंदिर में भगवान की पूजा करने के लिए एक पुजारी रखा। मंदिर के खर्च के लिए उसने बहुत सी भूमि, खेत और बगीचे मंदिर के नाम लगाए।

उन्होंने ऐसा प्रबंध किया था कि मंदिर में भूखे, दीन-दुखी: या साधू-संत आये तो वह वहां दो-चार दिन ठहर सके और उनको भोजन आदि के लिए मंदिर का प्रसाद मिल सके । अब उन्हें एक ऐसे व्यक्ति की आवश्कता थी जो मंदिर की सम्पति का प्रबंध करे और मंदिर के सब कामो को ठीक-ठाक और ईमानदारी से चला सके।

बहुत से लोग उस धनी पुरुष के पास आए और वह सभी लोग बहुत अच्छे से जानते थे यदि मंदिर की व्यवस्था देखने का कार्य यदि मिल जाये तो अच्छा वेतन भी मिलेगा। लेकिन उस धनी पुरुष ने सबको लौटा दिया। वह धनी पुरुष सबसे बस यही कहता था- ‘कि मुझे एक भला आदमी चाहिए और मैं स्वयं ही उसे ढूंढ लूँगा।’ Bhla Aadmi Story in Hindi

धनी पुरुष की यह बातें सुनकर बहुत से लोग उसे मन ही मन बहुत सी गलियां देते थे। कई लोग उसे मुर्ख और पागल भी बताते थे लेकिन वह धनी पुरुष किसी भी व्यक्ति की बातो पर ध्यान नही देता था।

जब मंदिर के पट खुलते थे तो बहुत से लोग मंदिर में दर्शन के लिए आया करते थे और वह अपने मकान की छत्त पर से मंदिर में आने वाले सभी व्यक्तियों को चुपचाप देखा करता था।

एक दिन एक निर्धन व्यक्ति मंदिर में दर्शन करने के लिए आया उसके कपड़े मैले और फटे हुए थे, वह बहुत पढ़ा-लिखा भी नहीं था। जब वह व्यक्ति मन्दिर से दर्शन करके जाने लगा तो उस धनी व्यक्ति ने उसे अपने पास बुलाया और कहा-‘क्या आप इस मंदिर की व्यवस्था सँभालने का कार्य स्वीकार्य करेंगे?’

Bhla Aadmi Story in Hindi वह मनुष्य बड़े आश्चर्य में पड़ गया। उसने कहा -‘ मैं तो ज्यादा पढ़ा-लिखा भी नही हूँ फिर इतने बड़े मंदिर के प्रबंध का कार्य कैसे कर सकूँगा?’

धनी पुरुष ने कहा-‘मुझे मंदिर के लिए कोई विद्वान व्यक्ति की आवश्कता नहीं है बस मै एक भले आदमी को मंदिर का प्रबंधक बनाना चाहता हूँ। ’

धनी व्यक्ति की बात सुनकर वह निर्धन व्यक्ति को बड़ा अचरज हुआ और उसने धनी व्यक्ति से कहा-‘महाशय ! आपने मंदिर में आने वाले इतने मनुष्यों में से मुझे ही भला आदमी क्यूँ माना?’

धनी पुरुष बोला-‘मैं जानता हूँ कि आप भले आदमी है मंदिर के रास्ते में एक ईट का टुकड़ा गड़ा रह गया था और उसका एक कोना ऊपर निकला हुआ था।

मैं बहुत दिनों से देख रहा था कि उस टुकड़े के कारण बहुत से लोगो को ठोकर लगती थी, लोग गिरते थे, लुढकते थे और बडबडा कर उठकर चल देते थे। Bhla Aadmi Story in Hindi

आपको उस टुकड़े से ठोकर लगी भी नही लेकिन आपने उस टुकड़े को उखाड़ने का प्रयास किया। असफल होने के बाद भी आप एक मजदूर से फावड़ा लेकर गये और उस टुकड़े को खोदकर वहां की भूमि आपने बराबर की जिससे किसी को ठोकर न लगे।‘

धनी व्यक्ति की बात सुनकर उस व्यक्ति ने कहा-‘ यह तो कोई बात नही है यह कार्य मेरे अलावा कोई भी व्यक्ति कर सकता है तो इससे भले आदमी होने का क्या पता चलता है?’ और फिर रास्ते में पड़े कांटे, कंकड़ और ठोकर लगने योग्य पत्थर, ईटो को हटा देना तो प्रत्येक मनुष्य कर्तव्य है।‘

उस व्यक्ति की तर्क भरी बात सुनकर धनी व्यक्ति थोडा मुस्कुराया और बड़े ही प्रेम से बोला-‘अपने कर्तव्य को जानने और पालन करने वाले ही तो भले आदमी होते है।‘

Bhla Aadmi Story in Hindi इस प्रकार उस निर्धन व्यक्ति को ही वह धनी व्यक्ति उस मंदिर का प्रबंधक बना देता है और उसके बाद वह निर्धन व्यक्ति मंदिर के प्रबंधक होने के तौर पर बहुत ही अच्छी व्यवस्था करता है जैसा उस धनी व्यक्ति ने सोचा था।

 

 

Mitra Ki Salah ki Kahani-सच्चे मित्र की सलाह देखिए कैसे काम आती है

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Mitra Ki Salah ki Kahani
Mitra Ki Salah ki Kahani

दोस्तों आज की कहानी का शीर्षक है Mitra Ki Salah ki Kahani और आज की कहानी में हम जानेंगे, कैसे एक व्यक्ति अपने मित्र को एक ऐसी अच्छी सलाह देता है जिससे उसके मित्र का जीवन ही बदल जाता है और वह सुखी और संपन्न जीवन व्यतीत करता है।

Mitra Ki Salah ki Kahani – सच्चे मित्र की सलाह देखिए कैसे काम आती है

दुर्गादास था तो धनी व्यक्ति लेकिन बहुत ही आलसी था। वह न तो अपने खेत देखने जाता था, न ही खलिहान जाता था, इसी के साथ वह अपने गाय-भैसों की भी खोज-खबर नही लेता था। यहाँ तक की वह इतना आलसी था कि अपने घर के सामानों की भी देख-रेख नही करता था, उसने सारा कार्य अपने नौकरों पर छोड़ रखा था।

उसके आलस और कुप्रबंध से घर की सारी व्यवस्था बिगड़ गई थी। उसको खेत में हानि होने लगी थी। दूसरी तरफ गाय-भैसों के दूध-घी से भी कुछ ख़ास लाभ नही हो रहा था।

Mitra Ki Salah ki Kahani एक दिन दुर्गादास का दोस्त रामेश्वर उसके घर आया उससे मिलने आया लेकिन घर आकर उसने जब घर की व्यवस्था देखी कि घर का तो बड़ा ही बुरा हाल है। उसने घर का हाल देखते ही समझ लिया की आलसी दुर्गादास को समझाने से वह अपना स्वभाव कभी नही बदलेगा।

रामेश्वर ने अपने मित्र दुर्गादास की भलाई करने के लिए उससे कहा-‘ मित्र ! तुम्हारी विपत्ति देख मुझे बड़ा ही दुःख हो रहा है। तुम्हारी इस दरिद्रता को देखकर इसे दूर करने का मैं एक उपाय जानता हूँ।

मित्र रामेश्वर की बात सुनकर दुर्गादास ने कहा-‘ कृपा करके वह उपाय मुझे बताओ मित्र मैं उसे अवश्य करूँगा।

रामेश्वर ने कहा-‘ मित्र मैंने सुना है मानसरोवर में रहने वाला एक सफ़ेद हंस का जोड़ा है जो सभी पक्षियों के भी जागने से पहले पृथ्वी पर घुमने आता है और भोर होने से पहले ही वापस मानसरोवर में चला जाता है लेकिन उसके आने का समय कोई निश्चित नही है लेकिन वह भोर होने से पहले ही रात्रि के तीसरे-चौथे पहर लौट जाता है। Mitra Ki Salah ki Kahani

बुजुर्गो का मानना है कि उनके दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति की सभी दरिद्रता और सभी विपत्ति का नाश हो जाता है और व्यक्ति का जीवन सुखमय हो जाता है।

मित्र रामेश्वर की यह बात सुनकर दुर्गादास बोला-‘कुछ भी हो जाये लेकिन मैं उन हंसो के दर्शन अवश्य करके रहूँगा। दुर्गादास को यह बात कहकर रामेश्वर वहां से चला गया।

अब दुर्गादास अगली सुबह जल्दी उठा और हंसो की खोज में वह बाहर निकला, हंसो की खोज में वह खलिहानों में गया वहां जाकर देखा, एक व्यक्ति उसके खलिहानों से गेहूं के ढेर से गेहूं चुरा रहा था।

Mitra Ki Salah ki Kahani  दुर्गादास ने उसे देखकर उसे चेताया और उसे डांटने लगा कि मेरे खलिहानों से गेहूं क्यों चुरा रहे हो? दुर्गादास को सामने देख गेहूं चोरी करने वाला व्यक्ति उसे देखकर लज्जित हो गया और उससे क्षमा मांगने लगा साथ ही आगे से कभी चोरी न करने का वादा कर वह व्यक्ति वहां से चला गया।

अब दुर्गादास खलिहान से घर लौट आया और गौशाला में गया। गौशाला की देखरेख करने वाला गाय का दूध दुह कर चुपचाप अपनी पत्नी को दे रहा था बदलने में कुल दूध में उतना ही पानी मिलाने जा रहा था।

यह सब देखकर दुर्गादास आग-बबूला हो गया और जोर से गौशाला की देखरेख करने वाले पर चिल्लाया और बोला-‘यह क्या कर रहे हो?’ यही कारण है कि अब दूध-घी से हमे लाभ नही हो रहा है। अपनी भूल को स्वीकारते हुए उस व्यक्ति ने माफ़ी मांगी।

गौशाला के बाद अब वह खेतो की तरफ निकल पड़ा। उसने खेत पर जाकर देखा दिन चढ़े तक खेत में मजदूर नही आये थे, वह वही रुक कर उनका इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद जब मजदूर आये तो उन्हें देर से आने का उलाहना देकर आगे से जल्दी आने के लिए उसने सभी मजदूरो को कहा। Mitra Ki Salah ki Kahani

इस प्रकार वह हंसो की खोज में जहाँ-जहाँ गया उसने हर जगह जाकर अपनी किसी न किसी को होने से रोका।

अब सफ़ेद हंसो की खोज में दुर्गादास प्रतिदिन सवेरे जल्दी उठने लगा और घुमने लगा। अब उसके नौकर ठीक से काम करने लगे, उसके यहाँ चोरी होना बंद हो गई। पहले वह रोगी रहता था लेकिन अब उसका स्वास्थ्य भी ठीक था।

जिन खेतो में उसे दस मन अन्न मिलता था उन्ही खेतो से अब उसे पच्चीस मन अन्न मिलने लगा। अब गौशाला से होने वाले दूध और घी से भी उसे अधिक लाभ मिलने लगा। यह सब होता देख दुर्गादास बहुत प्रसन्न था।

Mitra Ki Salah ki Kahani  एक दिन फिर दुर्गादास का मित्र रामेश्वर उससे मिलने उसके घर आया और दुर्गादास से बोला-‘कहो मित्र कैसे हो? सब ठीक तो है। रामेश्वर से बड़ी ही प्रसन्नता से दुर्गादास बोला-‘ईश्वर की कृपा से सब ठीक है। मित्र ! सफ़ेद हंस तो मुझे आज तक नही दिखे लेकिन उनकी खोज में मुझे बहुत लाभ हुआ है।

रामेश्वर दुर्गादास की बात सुनकर हँस पड़ा और बोला-‘मित्र ! परिश्रम करना ही वह सफ़ेद हंस है। परिश्रम के पर सदा उजले होते है। जो व्यक्ति अपना सारा कार्य नौकरों पर छोड़ देता है वह हानि उठाता है और जो व्यक्ति स्वयं परिश्रम करता है वह सदा संपत्ति और सम्मान पाता है।

Saras ki Shiksha ki Kahani – सारस ने क्या शिक्षा दी अपने बच्चो को

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Saras ki Shiksha ki Kahani
Saras ki Shiksha ki Kahani

आज की कहानी का शीर्षक है Saras ki Shiksha ki Kahani जिसके अनुसार आज की कहानी में सारस अपने बच्चो को किसान के माध्यम से जीवन की एक बहुत जरूरी शिक्षा देता है आखिर वह शिक्षा क्या थी चलिए कहानी को विस्तार से जानते है।

Saras ki Shiksha ki Kahani – सारस की शिक्षा

एक गांव के पास एक खेत में सारस पक्षी का एक जोड़ा रहता था। सारस और उसकी पत्नी बड़े ही प्रेम से वहां रहा करते थे। कुछ समय बाद सारस की पत्नी ने चार अंडे दिए। अब सारस और सारस की पत्नी दोनों मिलकर अंडो का बहुत ख्याल रखते थे।

समय के साथ साथ अंडे फुट गये और उनमे से प्यारे-प्यारे बच्चे निकल आये। लेकिन बच्चो के बड़े होकर उड़ने योग्य होने से पहले ही अब खेत की फसल पक कर तैयार हो चुकी थी। इस बारे में सोच कर दोनों ही बड़ी चिंता मे पड़ गये थे।

जब तक किसान फसल काटने आये, उससे पहले ही बच्चो के साथ उन्हें वहां से उड़ जाना चाहिए। वह दोनों इसी बारे में सोच रहे थे लेकिन बच्चे अभी बहुत छोटे थे और ठीक तरह से उड़ नही सकते थे इसलिए उनका उड़ जाना संभव नही था। Saras ki Shiksha ki Kahani

एक दिन जब सारस और उसकी पत्नी बच्चो के लिए खाने का प्रबंध करने जा रहे थे तो सारस ने बच्चो से कहा-‘ बच्चो हमारे घर पर न रहने पर यदि कोई खेत के पास आये तो उसकी बात सुनकर याद रखना और बोलना बिलकुल भी नहीं।

शाम को जब सारस बच्चो के लिए खाना लेकर लौटा तो बच्चो ने कहा-‘ पिता जी ! आज किसान आया था, वह खेत के चारो तरफ घूमता रहा। एक-दो स्थानों पर काफी देर तक खड़े होकर देर तक खेत को घूरता रहा।

वह कहता था कि खेत अब काटने योग्य हो गया है, आज ही जाकर गांव के लोगो से कहूँगा कि वे मेरा खेत कटवा दे।‘

सारस ने बच्चो से कहा-‘ तुम लोग डरो मत। खेत अभी नही कटेगा। अभी खेत को काटने में देर है तुम लोग चिंता मत करो, बस जब भी किसान खेत में आये तुम में से कोई भी बोलना नही चुप चाप उनकी सारी बाते सुनना।

कई दिन बाद जब सारस शाम को बच्चो के पास आये तो बच्चे बहुत घबराए हुए थे। वे कहने लगे-‘ अब हम लोगो को यह खेत झटपट छोड़ देना चाहिए। Saras ki Shiksha ki Kahani

आज किसान खेत पर फिर आया था। वह कह रहा था गाँव के लोग बड़े ही स्वार्थी हैं। वह मेरे खेत को कटवाने में मेरी मदद नही करना चाहते है। मैं कल ही अपने भाइयो को भेजकर खेत कटवा लूँगा।

सारस बच्चो की बात सुनकर निश्चिन्त होकर बैठा और बोला-‘ अभी खेत काटने में देर है। तब तक तुम लोग ठीक प्रकार से उड़ने लगोगे। डरने की कोई आवश्यकता नही है। तुम सब निश्चित रहो खेत अभी नही कटेगा।

सारस के कहे अनुसार कुछ दिन और बीत गये। किसान का खेत नही कटा और न ही खेत काटने कोई आया।

इस तरह कई दिन बीत गये। कुछ ही दिनों में सारस के बच्चे उड़ने लगे और उड़ने में निर्भय हो गये।

Saras ki Shiksha ki Kahani एक दिन शाम को जब सारस वापस लौटे तो बच्चो ने सारस से कहा-‘ यह किसान हमको झूट-मूठ डराता है।‘ इसका खेत तो कटेगा नही। यह हर बार कोई न कोई बहाना बना देता है।

पिता जी पता है आज किसान कह रहा था ‘मेरे भाई भी मेरी बात नही सुन रहे है और मुझे टाल रहे है। इस तरह तो मेरी फसल का सारा अन्न सुखकर झड़ जायेगा और मेरा भारी नुकसान हो जायेगा। मैं कल स्वयं आकर ही खेत काटूँगा।

यह सुनकर सारस घबराकर बोला-‘ चलो ! जल्दी करो ! अभी अँधेरा नहीं हुआ है, दुसरे सुरक्षित स्थान पर उड़ चलो। कल खेत अवश्य कट जायेगा।

बच्चे बोले-‘ पिता जी ! इस बार खेत कट जायेगा यह कैसे?

सारस ने कहा-‘ किसान जब तक गावंवालो और अपने भाइयो के सहारे था, खेत के कटने की आशा नही थी। जो भी व्यक्ति दुसरो के भरोसे कोई काम छोड़ता है, तो उसका काम कभी नही होता। लेकिन जो व्यक्ति किसी भी कार्य को स्वयं करने की ठान लेता है उसका काम अवश्य सफल होता है। Saras ki Shiksha ki Kahani

अब किसान स्वयं ही फसल काटने सुबह खेत पर आ जायेगा तो कल अवश्य ही खेत कटना शुरू हो जायेगा। इतना कहकर सारस अपने बच्चो और पत्नी संग सभी के साथ उडकर एक अन्य सुरक्षित स्थान पर चला गया।

शिक्षा :- हमे कभी भी कोई कार्य कल पर नही टालना चाहिए अपने कार्य को सही समय पर करना चाहिए, समय पर किया गया कार्य सदा सफल होता है।