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Makkhi ka Lalach Kahani in Hindi – मक्खी का लालच

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Makkhi ka Lalach Kahani in Hindi
Makkhi ka Lalach Kahani in Hindi

दोस्तों कहते है लालच किसी इंसान के लिए हो या फिर किसी भी जीवित प्राणी के लिए हमेशा नुकसानदायक ही होता है ऐसा ही कुछ आज की कहानी में भी है Makkhi ka Lalach Kahani in Hindi – मक्खी का लालच, कहानी में एक मक्खी के लोभ के कारण अनेको मक्खियों की जान चली जाती है आखिर कहानी में ऐसा क्या होता है चलिए कहानी को विस्तार से जानते है ।

Makkhi ka Lalach Kahani in Hindi – मक्खी का लालच

एक समय की बात है कुछ मक्खियाँ का झुण्ड एक दिन घूमते-घूमते हुए एक नगर के बाजार से होता हुआ गुजरा । उन्होंने बाजार में अनेक प्रकार के पकवान, मिठाई, फल और विभिन्न तरह की खाने की चीजे देखी और उन्हें भिन्न भिन्न प्रकार के खाने की सुगंध भी आ रही थी ।

मक्खियों की रानी ने सभी को आदेश दिया जब तक बाजार लगा हुआ है सभी मक्खियाँ खाने का प्रबंध करे और भविष्य के लिए भी खाना एकत्र करने की तैयारी करे लेकिन कोई भी खाने के लालच में दूर नही जायेगा और सभी झुण्ड के साथ ही रहेंगे ।

इतना सुनकर सभी मक्खियाँ अलग अलग दिशा में खाने की तलाश में निकल पड़ी ।

Makkhi ka Lalach Kahani in Hindi एक झुण्ड ने फलो और सब्जियों की दुकान में जाकर खाने का प्रबंध करने की शुरुआत की दुसरे झुण्ड ने मिठाई की दुकान में जाकर, इस प्रकार सभी मक्खियाँ अलग अलग झुण्ड बनाकर अपने काम में लग गयी ।

तभी एक मक्खी की नजर एक दुकान पर पड़ी जहाँ से अत्यंत स्वादिष्ट खाने की सुगंध आ रही थी । एक मक्खी ने दूसरी मक्खी से कहा ‘मित्र !  देख उस दुकान में अवश्य ही कोई स्वादिष्ट चीज़ मिल रही होगी देख कितनी अच्छी लग रही है वह क्या है?’

दूसरी मक्खी ने कहा ‘नही मित्र ! हमे झुण्ड से दूर नही जाना चाहिए । वहाँ अकेले खतरा भी हो सकता है । लेकिन पहले वाली मक्खी नही मानी और उस दुकान में चली गयी । उसे देख बाकि मक्खियाँ भी लालच में आकर उसके पीछे पीछे चली आई ।

वहाँ जाकर उसने देखा एक व्यापारी अपने ग्राहक को शहद दे रहा था । Makkhi ka Lalach Kahani in Hindi

अचानक व्यापारी के हाथ से छूटकर शहद का बर्तन गिर पड़ा । बहुत – सा शहद भूमि पर गिर जाता है । जितना शहद व्यापारी उठा सकता था , उतना उसने ऊपर – ऊपर से उठा लिया ; लेकिन कुछ शहद भूमि में गिरा रह गया ।

सभी मक्खियाँ शहद की मिठास के लोभ से आकर उस शहद पर बैठ गयीं । मीठा – मीठा शहद उन्हें बहुत अच्छा लगा । जल्दी – जल्दी वे उसे चाटने लगीं ।

Makkhi ka Lalach Kahani in Hindi जब तक उनका पेट भर नहीं गया , वे शहद चाटने में लगी रहीं । जब मक्खियों का पेट भर गया , उन्होंने उड़ना चाहा । लेकिन उनके पंख शहद से चिपक गये थे ।

उड़नेके लिये वे जितना छटपटाती जितना कोशिश करती थीं , उतने ही उनके पंख चिपकते जाते थे । उनके सारे शरीर में शहद लगता जा रहा था ।

बहुत – सी मक्खियाँ शहद में लोट – पोट होकर मर गयीं । बहुत – सी पंख चिपकने से अभी भी छटपटा रही थीं । लेकिन दूसरी नयी – नयी मक्खियाँ शहद के लालच से वहाँ आती – जा रही थीं । मरी और छटपटाती मक्खियों को देखकर भी वे शहद खाने का लोभ छोड़ नहीं छोड़ पा रही थीं ।

मक्खियों की दुर्गति और मूर्खता देखकर व्यापारी बोला- ‘ जो लोग जीभ के स्वाद के लोभ में पड़ जाते हैं , वे इन मक्खियों के समान ही मूर्ख होते हैं । स्वाद का थोड़ी देर का सुख उठाने के लोभ से वे अपना स्वास्थ्य नष्ट कर देते हैं , रोगी बनकर छटपटाते हैं और शीघ्र मृत्यु के ग्रास बनते हैं । ‘ Makkhi ka Lalach Kahani in Hindi

 

Teachers Day Quotes in Hindi 2022 | Teachers Day Shayari in Hindi

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Teachers Day Quotes in Hindi 2022
Teachers Day Quotes in Hindi 2022

दोस्तों “शिक्षक दिवस” भारत में हर वर्ष 5 सितंबर को पुरे देश में मनाया जाता है इस दिन सभी लोग अपने शिक्षको को याद करते है और उन्हें शिक्षक दिवस की बधाई देते है आज मैं आपके लिए Teachers Day Quotes in Hindi 2022  एक शिक्षक का हर किसी के जीवन में एक विशेष स्थान होता है और आज हम अपने सभी शिक्षको को इन कोट्स के माध्यम से बधाई देंगे.

Teachers Day Quotes in Hindi 2022 | Teachers Day Shayari in Hindi

जो किया मेरे लिए, उसका कैसे चुकाऊं मै मोल
आपकी शिक्षा मेरे लिए, जीवन में बड़ी अनमोल …

Teachers Day Quotes in Hindi 2022
Teachers Day Quotes in Hindi 2022

जब दरवाजे हो बंद सभी, सही रास्ता दिखाते है गुरु
देते सिर्फ शिक्षा ही नही, जीवन जीना सिखाते है गुरु…

अज्ञानता को दूर कर, ज्ञान की ज्योत जलाई है,
आपसे ही जीवन की पहली शिक्षा पाई है,
गर कभी गलत राह पर भटके हम,
आपने अच्छे बुरे की सीख सिखाई है…

यह शिक्षक होते है ज्ञान की ज्योति,
इनकी दी शिक्षा कभी कम नही होती,
फिर भी अगर भटके कभी बच्चो का ध्यान,
इनकी छड़ी सदा इनके पास है होती …

Teachers Day Quotes in Hindi

बिना आपके ज्ञान के, आगे न बढ़े कोई घड़ी,
जब कभी भी अज्ञानता हमपर आन पड़ी,
गुरुदेव ने दिया, हमे ज्ञान का सहारा,
हमे अज्ञान रूपी सागर से, हमेशा है उबारा…

Teachers Day Quotes in Hindi
Teachers Day Quotes in Hindi

गुरु ही है जीवन का आकार,
इनसे मिले सफलता का आधार,
यही देते है हमे ज्ञान की दीक्षा,
जिसे हम कहते है अनमोल शिक्षा…

करता करे न करी सके, गुरु करे सो होय,
तीन लोक नवखण्ड में, गुरु से बड़ा ना कोय,
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

त्वमेव माता च पिता त्वमेव,
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव,
त्वमेव विद्या च द्रविणं त्वमेव,
त्वमेव सर्वम मम देव देव…

Teachers Day Quotes Hindi

शिक्षक को कमजोर न समझे,
शिक्षक अपने शब्दों से,
सीधा मष्तिष्क पर असर करता है…

Teachers Day Quotes Hindi
Teachers Day Quotes Hindi

आपसे ही सीखा है,
और आपसे ही जाना,
शिक्षा का न मोल कोई,
यह है अनमोल खजाना…

आपने किया कुछ ऐसा है,
आज बना हूँ मैं कुछ करने योग्य,
खुद की क्या तारीफ करूँ,
आपकी शिक्षा को नमन करते है लोग…

Teachers Day Quotes in Hindi 2022

आपकी शिक्षा से गुरुदेव,
पाया है जीवन का हर लक्ष्य,
मन में है विश्वास अपार,
जो बचा उसे पाउँगा अवश्य…

Teachers Day Wishes 2022

शिक्षक दीपक से होते है,
जो खुद जलकर शिष्यों के,
जीवन को रोशन कर देते है…

Teachers Day Wishes 2022
Teachers Day Wishes 2022

आज याद आता है वो अपना स्कूल,
जहाँ सीखा बहुत कुछ, और की बहुत सी भूल,
बीता है जीवन का जहाँ, एक अहम हिस्सा,
आज याद आता है स्कूल का हर एक किस्सा..

पत्थर को तराश के, है मूर्ति जिसने बनाया,
अज्ञानता को दूर करने वाला ही शिक्षक कहलाया…

मेरे छिपे हुए हुनर को, जिसने पहचान दी,
मेरे जीवन के पहलू में, जान जिसने डाल दी,
एक दोस्त एक साथी की तरह हमेशा मुझे समझाया.
मेरे गुरुजनों ने ही आज मुझे शिक्षक बनाया…

Teachers day wishes in hindi

जमीं से आसमान तक,
धरती से चाँद तक,
अज्ञानता से ज्ञान तक,
सबकुछ सिखाया जिसने,
शिक्षक है वही और मेरा भगवान तक…

वक्त और शिक्षक एक से है लेकिन,
शिक्षक समझाकर इम्तिहान लेता है,
लेकिन वक्त इम्तिहान लेकर समझाता है…

Teachers day wishes in hindi
Teachers day wishes in hindi

शिक्षक दिवस पर मेरे,
सभी गुरुजनों को मेरा सादर प्रणाम…
शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं…

कोई देश नेताओ से नही बल्कि,
शिक्षा और शिक्षक से महान बनता है…

Teachers Day Status

गुरु के ज्ञान का न है आदि न है अंत,
कोई शिक्षा से बना महान, कोई शिक्षा से बन गया संत…

जो सीख दे कोई, सिखाये सही गलत की पहचान,
उसे ही कहते है शिक्षक, वही है पहला भगवान…

भविष्य और वर्तमान को बदलने की ताकत,
केवल शिक्षक के हाथ में होती है,

आपको पढ़ाने वाला ही गुरु नही होता,
बल्कि आपके जीवन में हर कार्य को सिखाने वाला
भी गुरु ही होता है…

Happy Teachers Day 2022

वैसे तो इन्टरनेट पर,
हर प्रकार का ज्ञान मिल जाता है,
लेकिन फिर भी अच्छे बुरे की,
पहचान तो गुरु ही बताता है…

Teachers Day Quotes in Hindi 2022
Teachers Day Quotes in Hindi 2022

गुरु बिना है ज्ञान कहाँ,
और बिना ज्ञान के मान कहाँ,
और बिना ज्ञान के जीवन में,
सम्मान कहाँ सम्मान कहाँ…

जीवन में गुरु का महत्त्व कभी होगा न खत्म,
पा ले सफलता कोई भी, चाहे खूब उन्नति करे हम…

मुर्ख को बुद्धि दी,
अज्ञानी को ज्ञान,
साधारण को गुरु ने ही,
बनाया मनुष्य महान…

Happy Teachers Day Quotes in Hindi

माँ-बाप ने ऊँगली पकडकर चलना सिखाया,
लेकिन गुरु ने जीवन में गिरकर,
स्वयं ही उठकर चलना सिखाया…

Happy Teachers Day Quotes in Hindi
Happy Teachers Day Quotes in Hindi

शिक्षा ने समन्दर से, वो वो चुन चुन लाता मोती,
शिक्षित होने की राह भी आसान नही होती,
लेकिन गुरु ने सिखाया ऐसा ज्ञान,
जीवन की हर मुश्किल को कर दिया आसान…

एक शिक्षक के पास वह कला है,
जो आपको महात्मा गाँधी, भीम राव अम्बेडकर,
शहीद भगत सिंह और सुभाष चन्द्र बोस,
भी बना सकती है…

जीवन में गिरकर कैसे है संभलना,
सही राह पर कैसे है चलना,
सिखाया है आपने जीवन का सार,
आपकी शिक्षा से मिला जीवन को आधार…

Teachers Day Quotes in Hindi 2022 Quotes for Teachers Day

अज्ञानता के अंधकार को दूर कर,
सही राह दिखाते है गुरु,
इंसान को इंसानियत सिखाते है गुरु…

Teachers Day Quotes in Hindi 2022
Teachers Day Quotes in Hindi 2022

शिक्षक शिष्टाचार और आचरण की मूरत है,
इनकी शिक्षा अनमोल और बहुत खुबसूरत है,
इनके ज्ञान से दूर मेरा अज्ञान हुआ है,
इनकी सूरत में दिखे मुझे भगवान की सूरत है…

जीने की कला शिक्षक सिखाते है,
ज्ञान की कीमत हमे शिक्षक बताते है,
किताबो के होने से कुछ नहीं होता,
अरे शिक्षक तो बिना किताबो के भी पढ़ाते है…

Teachers Day कब मनाया जाता है ?

अगर भारत की बात करे तो भारत में शिक्षक दिवस (Teachers Day) प्रत्येक वर्ष 5 सितम्बर को मनाया जाता है Teachers Day Quotes in Hindi 2022 इस दिन पुरे देश में शिक्षको को लेकर बड़ी ही सरलता और सम्मान के साथ यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन को हर विद्यार्थी अपने शिक्षक के प्रति सम्मान और अपने शिक्षक के प्रति समर्पण का भाव रखकर अपने शिक्षको को बधाई देते है।

Teachers Day Quotes in Hindi 2022
Teachers Day Quotes in Hindi 2022

इस दिन विद्यालयों में उच्च कक्षा के छात्र/छात्राओं को एक दिन के लिए शिक्षक की उपाधि दी जाती है और शिक्षको का परिश्रम और उनकी विद्यालय के प्रति जिम्मेदारी की भावना जाग्रत करने हेतु यह दिन दिया जाता है जिससे बच्चे अपने शिक्षक के परिश्रम को समझे और उनका सम्मान करे। Teachers Day Quotes in Hindi 2022

भारत के अलावा अमेरिका में शिक्षक दिवस 2 मई, चीन में 10 सितम्बर, रूस में 5 अक्टूबर और इसी के साथ विश्व शिक्षक दिवस भी 5 अक्टूबर को पुरे विश्व में इस दिवस को मनाया जाता है।

Teachers Day क्यों मनाया जाता है ?

दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं शिक्षक दिवस भारत में हर वर्ष 5 सितंबर के दिन मनाया जाता है शिक्षक दिवस भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षक दिवस शिक्षकों के सम्मान में मनाया जाता है ।

शिक्षक दिवस पर स्कूलों में शिक्षकों के सम्मान में कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है भारत के अलग अलग शहरों के स्कूलों में इस दिन बच्चे स्कूल के शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं।

दुनिया के विभिन्न देशों में अलग-अलग दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता है भारत देश में 5 सितंबर 1962 से शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है Teachers Day Quotes in Hindi 2022 शिक्षक दिवस के दिन सरकार द्वारा कुछ महान शिक्षकों को सम्मानित भी किया जाता है जिन्होंने शिक्षा के साथ साथ और भी कई क्षेत्रो में उपलब्धियां हासिल की होती है।

Shikari or Hiran ki Kahani शिकारी ने क्यों दिया हिरन को जीवनदान?

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Shikari or Hiran ki Kahani
Shikari or Hiran ki Kahani

कैसे हो दोस्तों आज मैं आपके लिए एक और नई और रोचक कहानी लेकर आया हूँ जिसका शीर्षक है Shikari or Hiran ki Kahani शिकारी ने क्यों दिया हिरन को जीवनदान? कहानी में आज मैं आपको बताऊंगा कैसे एक शिकारी जो शिकार करने जंगल आया था लेकिन फिर भी उसने हाथ आये शिकार हिरन को प्राण दान दे दिया। चलिए कहानी को विस्तार से जानते है:- 

Shikari or Hiran ki Kahani शिकारी ने क्यों दिया हिरन को जीवनदान?

पुराण में एक बहुत सुन्दर कथा आती है। एक जंगल में एक तालाब था। उस जंगल के पशु उसी तालाब में पानी पीने आया करते थे । एक दिन एक शिकारी उस तालाब के पास आया । उसने तालाब में हाथ – मुँह धोकर पानी पिया शिकारी बहुत थका था और कई दिन का भूखा था ।

उसने सोचा- ‘ जंगल के पशु इस तालाब के पास पानी पीने अवश्य आयेंगे । यहाँ मुझे सरलता से शिकार मिल जायगा । तालाब के पास एक बेल के पेड़ पर चढ़कर वह बैठ गया । एक हिरनी थोड़ी देर में तालाब में पानी पीने आयी । शिकारी ने हिरनी को मारने के लिये धनुष पर बाण चढ़ाया। Shikari or Hiran ki Kahani 

हिरनी ने शिकारी को बाण चढ़ाते देख लिया । वह बोली- ‘ भाई शिकारी मैं जानती हूँ कि अब मैं भागकर तुम्हारे बाण से बच नहीं सकती किंतु तुम मुझ पर दया करो । मेरे दो छोटे – छोटे बच्चे मेरा रास्ता देखते होंगे । तुम मुझे थोड़ी देर की छुट्टी दे दो । मैं तुम्हें वचन देती हूँ कि अपने बच्चों को दूध पिलाकर और उन्हें अपनी सहेली हिरनी को सौंपकर तुम्हारे पास लौट आऊँगी ।

शिकारी हँसा । उसे यह विश्वास नहीं हुआ कि यह हिरनी प्राण देने फिर उसके पास लौटेगी । लेकिन उसने सोचा- ‘ जब यह इस प्रकार कहती है तो इसे छोड़ देना चाहिये । मेरे भाग्य में होगा तो मुझे दूसरा शिकार मिल जायगा । ‘ उसने हिरनी को चले जाने दिया ।

Shikari or Hiran ki Kahani  थोड़ी देर में वहाँ बड़ी सींगों वाला सुन्दर काला हिरन पानी पीने आया । शिकारी ने जब उसे मारने के लिये धनुष पर बाण चढ़ाया तो हिरन ने देख लिया और बोला – भाई शिकारी ! अपनी हिरनी और बच्चों से अलग हुए मुझे देर हो गयी है । वे सब घबरा रहे होंगे ।

मैं उनके पास जाकर उनसे मिल लूँ और उन्हें समझा दूँ , तब तुम्हारे पास अवश्य आऊँगा । इस समय दया करके तुम मुझे चले जाने दो । ‘ शिकारी बहुत झल्लाया । उसे बहुत भूख लगी थी ।

लेकिन हिरन को उसने यह सोचकर चले जाने दिया कि मेरे भाग्य में भूखा ही रहना होगा तो आज और भूखा रहूँगा । हिरनी अपने बच्चों के पास गयी । उसने बच्चों को दूध पिलाया , प्यार किया । फिर अपनी सहेली हिरनी को सब बातें बताकर उसने अपने बच्चे सौंपने चाहे । इतने में वहाँ वह हिरन भी आ गया ।

उसने भी बच्चों को प्यार किया । बच्चे अपने माता – पिता से अलग होने को तैयार नहीं होते थे । अन्त में उनका हठ मानकर हिरन और हिरनी ने उन्हें भी साथ ले लिया ।

तालाब के पास आकर हिरन ने शिकारी से कहा- ‘ भाई शिकारी ! अब हम लोग आ गये हैं । तुम अब हमें अपने बाणों से मारो और हमारे मांस से अपनी भूख मिटाओ । ‘Shikari or Hiran ki Kahani

हिरन और हिरनी की सच्चाई देखकर शिकारी को बड़ा आश्चर्य हुआ । वह पेड़ पर से नीचे उतर आया और बोला देखो ! ये हिरन पशु होकर भी अपनी बात के कितने सच्चे हैं । ये प्राण का मोह छोड़ कर सत्य की रक्षा के लिये मेरे पास आये हैं ।

मनुष्य होकर भी मैं कितना नीच और पापी हूँ कि अपना पेट भरने और चार पैसे कमाने के लिये निरपराध पशुओं की हत्या करता हूँ । अबसे मैं किसी पशुको नहीं मारूंगा । ‘

शिकारी ने अपना धनुष तोड़कर फेंक दिया । उसी समय वहाँ स्वर्ग से एक विमान उतरा । उस विमान को लाने वाले देव दूत ने कहा- ‘ शिकारी ! ये हिरन सत्य की रक्षा करने के कारण निष्पाप हो गये हैं , ये अब स्वर्ग को जायँगे ।

Shikari or Hiran ki Kahani  तुमने भी आज इन जीवों पर दया की , इसलिये तुम भी इनके साथ स्वर्ग चलो । हिरन – हिरनी और उनके दोनों बच्चों का रूप देवताओं के समान हो गया । वह शिकारी भी देवता बन गया । सत्य और दया के प्रभाव से विमान में बैठकर वे सब स्वर्ग चले गये ।

Apni Raksha Swaym Kare – अपनी रक्षा स्वयं करे,हिंदी शिक्षाप्रद कहानी

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Apni Raksha Swaym Kare
Apni Raksha Swaym Kare

दोस्तों कहने को तो हमारे बहुत सारे मित्र और शुभचिंतक होते हिया लेकिन समय पर जो काम आये वही सही और सच्चा दोस्त होता है आज की कहानी Apni Raksha Swaym Kare – अपनी रक्षा स्वयं करे,हिंदी शिक्षाप्रद कहानी भी कुछ इसी सच पर आधारित है ।

जहाँ एक खरगोश अपने सभी दोस्तों से मदद मांगता है लेकिन उसका कोई दोस्त उसकी मदद नही करता आखिर ऐसा क्या हुआ और खरगोश की मदद न की और मदद न करने के पीछे उसके दोस्तों ने क्या कारण, बताता चलिए कहानी को विस्तार से जानते है।

Apni Raksha Swaym Kare – अपनी रक्षा स्वयं करे,हिंदी शिक्षाप्रद कहानी

एक किसान के पास एक गाय और एक घोड़ा था । वे दोनों एक साथ जंगल में चरते थे । किसान के पड़ोस में एक धोबी रहता था । धोबी के पास एक गधा और एक बकरी थी । धोबी भी उन्हें उसी जंगल में चरने को छोड़ देता था । एक साथ चरने से चारों पशुओं में मित्रता हो गयी । 

वे साथ ही जंगल में आते और शाम को एक साथ जंगल से चले जाते थे । उस जंगल में एक खरगोश भी रहता था । खरगोश ने चारों पशुओं की मित्रता देखी तो सोचने लगा- ‘ मेरी भी इनसे मित्रता हो जाय तो बड़ा अच्छा हो । Apni Raksha Swaym Kare

इतने बड़े पशुओं से मित्रता होने पर कोई कुत्ता मुझे तंग नहीं कर सकेगा । ‘ खरगोश उन चारों के पास बार – बार आने लगा । वह उनके सामने उछलता , कूदता और उनके साथ ही चरता था । धीरे – धीरे चारों के साथ उसकी मित्रता हो गयी। अब खरगोश बड़ा प्रसन्न हुआ । उसने समझा कि कुत्तों का भय दूर हो गया । 

एक दिन एक कुत्ता उस जंगल में आया और खरगोश के पीछे दौड़ा ।

खरगोश भागा – भागा गाय के पास गया और बोला- ‘ गो माता ! यह कुत्ता बहुत दुष्ट है । यह मुझे मारने आया है । तुम इसे अपनी सींगों से मारो । ‘ गायने कहा- ‘ भाई खरगोश ! तुम बहुत देरी से आये । मेरे घर लौटने का समय हो गया है । मेरा बछड़ा भूखा होगा और बार – बार मुझे पुकारता होगा । मुझे घर जाने की जल्दी है । तुम घोड़े के पास जाओ । 

खरगोश दौड़ता हुआ घोड़े के पास गया और बोला- ‘ भाई घोड़े ! मैं तुम्हारा मित्र हूँ । हम दोनों साथ ही यहाँ चरते हैं । आज यह दुष्ट कुत्ता मेरे पीछे पड़ा है । तुम मुझे पीठपर बैठा कर दूर ले चलो । Apni Raksha Swaym Kare घोड़े ने कहा- ‘ तुम्हारी बात तो ठीक है , किंतु मुझे बैठना आता नहीं । मैं तो खड़े – खड़े ही सोता हूँ ।

तुम मेरी पीठ पर चढ़ोगे कैसे ? आजकल मेरे सुम बढ़ गये हैं। मैं न तो तेज दौड़ सकता हूँ और न पैर फटकार सकता हूँ । एक काम करो तुम गधे के पास जाओ वह अवश्य ही तुम्हारी मदद करेगा।

खरगोश घोड़े के पास से निराश होकर खरगोश गधे के पास गया । उसने गधे से कहा- ‘ मित्र गधे ! तुम इस पाजी कुत्ते पर एक दुलत्ती झाड़ दो तो मेरे प्राण बच जायँ । 

गधा बोला- ‘ मैं नित्य गाय और घोड़े के साथ घर लौटता हूँ । वे दोनों जा रहे हैं । यदि मैं उनके साथ न जाकर पीछे रह जाऊँ तो मेरा स्वामी धोबी डंडा लेकर दौड़ा आयेगा और पीटते – पीटते मेरा कचूमर निकाल देगा । मैं अब यहाँ ठहर नहीं सकता । तुम ऐसा करो कि तुम बकरी के पास जाओ। Apni Raksha Swaym Kare

अन्त में खरगोश बकरी के पास गया । बकरी ने उसे देखते ही कहा- ‘ खरगोश भाई ! कृपा करके इधर मत आओ । तुम्हारे पीछे कुत्ता दौड़ता चला आ रहा है । मैं उससे बहुत डरती हूँ । बकरी के इस जवाब को सुनकर खरगोश निराश हो गया और निराश होकर खरगोश वहाँ से भागा ।

भागते – भागते वह जाकर एक झाड़ी में छिप गया । कुत्ते ने बहुत ढूँढ़ा ; किंतु उसे खरगोश का पता नहीं मिला । जब कुत्ता लौट गया , तब खरगोश झाड़ी में से निकला । उसने चारों ओर देखा और संतोष की साँस ली , फिर वह बोला – ‘ दूसरों का भरोसा करना सदा धोखा देता है । हमे अपनी सहायता अपने आप ही करनी चाहिये । 

शिक्षा : हमे कभी भी किसी पर भी अँधा विश्वास नहीं करना चाहिए और न ही कभी किसी से मदद की आशा रखनी चाहिए हमे सदैव अपनी सहायता स्वयं ही करनी चाहिए।  Apni Raksha Swaym Kare

Hans or Kauve ki Kahani – हंस और कौवे की अत्यंत रोचक कहानी

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Hans or Kauve ki Kahani in Hindi
Hans or Kauve ki Kahani in Hindi

दोस्तों आज की कहानी की अगर मैं बात करूँ तो आज की हमारी कहानी है Hans or Kauve ki Kahani in Hindi – हंस और कौवे की अत्यंत रोचक कहानी कहानी में एक कौवा अत्यंत घमंडी होता है और वह घमंड में चूर होकर दूर उड़ने वाले हंसो से प्रतियोगिया करता है लेकिन कहानी में ऐसा क्या होता है कि उसे हंसो से माफ़ी मांगनी पड़ती है चलिए कहानी के द्वारा जानते है:-

Hans or Kauve ki Kahani in Hindi – हंस और कौवे की अत्यंत रोचक कहानी

समुद्र तट के किसी नगर में एक धनवान् वैश्य के पुत्रों ने एक कौआ पाल रखा था । वे उस कौए को बराबर अपने भोजन से बचा अन्न देते थे उनकी जूँठन खाने वाला वह कौआ स्वादिष्ट तथा पौष्टिक भोजन खाकर खूब मोटा हो गया था । इससे उसका अहंकार बहुत बढ़ गया । वह अपने से श्रेष्ठ पक्षियों को भी तुच्छ समझने और उनका अपमान करने लगा ।

एक दिन समुद्रतट पर कहीं से उड़ते हुए आकर कुछ हंस उतरे। वैश्य के पुत्र उन हंसों की प्रशंसा कर रहे थे , यह बात कौए से सही नहीं गयी । वह उन हंसों के पास गया और उसे उनमें जो सर्वश्रेष्ठ हंस प्रतीत हुआ , उससे बोला- ‘ मैं तुम्हारे साथ प्रतियोगिता करके उड़ना चाहता हूँ। Hans or Kauve ki Kahani in Hindi

हंसों ने उसे समझाया- ‘ भैया ! हम तो दूर – दूर उड़ने वाले हैं । हमारा निवास मानसरोवर यहाँ से बहुत दूर है । हमारे साथ प्रतियोगिता करने से तुम्हें क्या लाभ होगा । तुम हंसों के साथ कैसे उड़ सकते हो ?

कौए ने गर्व में आकर कहा- ‘ मैं उड़ने की सौ गतियाँ जानता हूँ और प्रत्येक से सौ योजन तक उड़ सकता हूँ । ‘ उड्डीन , अवडीन , प्रडीन , डीन आदि अनेकों गतियों के नाम गिनाकर वह  कौआ बोला- ‘ बतलाओ , इनमें से तुम किस गति से उड़ना चाहते हो ? ‘

तब श्रेष्ठ हंसने कहा- ‘ काक ! तुम तो बड़े निपुण हो । परंतु मैं तो एक ही गति जानता हूँ , जिसे सब पक्षी जानते हैं । मैं उसी गति से उड़ेगा । ‘ गर्वित कौए का गर्व और बढ़ गया ।

Hans or Kauve ki Kahani in Hindi वह बोला – ‘ अच्छी बात , तुम जो गति जानते हो उसी से उड़ो । ‘ उस समय कुछ पक्षी वहाँ और आ गये थे । उनके सामने ही हंस और कौआ दोनों समुद्र की ओर उड़े ।

समुद्र के ऊपर आकाश में वह कौआ नाना प्रकार की कलाबाजियाँ दिखाता पूरी शक्ति से उड़ा और हंस से कुछ आगे निकल गया । हंस अपनी स्वाभाविक मन्द गति से उड़ रहा था । यह देखकर दूसरे कौए प्रसन्नता प्रकट करने लगे ।

थोड़ी देर में ही कौए के पंख थकने लगे । वह विश्राम के लिये इधर – उधर वृक्ष युक्त द्वीपों की खोज करने लगा । परंतु उसे उस अनन्त सागर के अतिरिक्त कुछ दीख नहीं पड़ता था । इतने समय में हंस उड़ता हुआ उससे आगे निकल गया था ।

कौएकी गति मन्द गयी । वह अत्यन्त थक गया और ऊँची तरंगों वाले भयंकर जीवों से भरे समुद्र की लहरों के पास गिरने की दशा में पहुँच गया । हंस ने देखा कि कौआ बहुत पीछे रह गया है तो रुक गया । Hans or Kauve ki Kahani in Hindi

उसने कौए के समीप आकर पूछा- ‘ काक ! तुम्हारी चोंच और पंख बार – बार पानी में डूब रहे हैं । यह तुम्हारी कौन – सी गति है ? ‘ हंस की व्यंगभरी बात सुनकर कौआ बड़ी दीनता से बोला- ‘ हंस ! हम कौए केवल काँव – काँव करना जानते हैं । हमें भला दूर तक उड़ना क्या आये ।  

मुझे अपनी मूर्खता का दण्ड मिल गया । कृपा करके अब मेरे प्राण बचा लो ‘ जल से भीगे , अचेत और अधमरे कौए पर हंस को दया आ गयी । पैरों से उसे उठाकर हंसने पीठ पर रख लिया और उसे लादे हुए उड़कर वहाँ आया जहाँ से दोनों उड़े थे । हंसने कौए को उसके स्थान पर छोड़ दिया ।

कौए ने अपने प्राण बचाने के लिए हंस का धन्यवाद किया और आगे से कभी घमंड न करने का प्रण भी किया । हंस ने हँसकर कौवे का धन्यवाद लिया और अपनी आगे की यात्रा पर निकल पड़े । Hans or Kauve ki Kahani in Hindi