Home Blog Page 15

Bandar aur Magarmach ki kahani – मेरा कलेजा तो पेड़ पर टंगा है !

12
Bandar aur Magarmach ki kahani

एक नदी के किनारे जामुन का एक बहुत बड़ा पेड़ था,एक बन्दर उस पेड़ पर रहता था | बन्दर उस पेड़ के जामुन खाता और खूब मजे से उस पेड़ पर रहता था | उसी नदी में एक मगरमच्छ भी रहता था जो अक्सर उस पेड़ के नीचे आकर पेड़ पर से गिरे जामुन खाता था | Bandar aur Magarmach ki kahani

Bandar aur Magarmach ki kahani

कुछ समय बाद दोनों में गहरी मित्र हो गई अब बन्दर स्वयं भी जामुन खाता और और काले काले रसीले  जामुन अपने मित्र को भी खिलाता था,वह जोर से पेड़ की डाल को हिलाता था और बहुत सारे ताजे जामुन पेड़ से नीचे गिर जाते जिसे मगरमच्छ खाकर खुश होता था और कुछ जामुन वह अपनी पत्नी के लिए भी ले जाता था |

मीठे जामुन खाकर मगर की पत्नी भी बहुत खुश होती थी |

किन्तु मगर की बन्दर के साथ दोस्ती मगर की पत्नी को अच्छी नही लगती थी,एक दिन मगर की पत्नी ने मगर से कहा की क्या भला बन्दर और मगरमच्छ की भी दोस्ती होती है ? मगर तो बन्दर को खा जाते है तुम जरुर झूठ बोलते हो |

तो मगर ने कहा – मै सच बोलता हूँ वह बहुत भला है और देखो न तुम्हारे लिए वह कितने मीठे मीठे जामुन भेजता है | अगर बन्दर मेरा दोस्त न होता तो मै जामुन कहाँ से लाता तुम तो जानती हो मै तो पेड़ पर भी नहीं चढ़ सकता |

मगर की पत्नी ने कहा,बन्दर अगर रोज इतने मिट्ठे मीठे जामुन खाता है तो उसका मांस कितना मीठा होगा ? उसके मन में एक युक्ति सूझती है वह अपने पति से कहती है अगर सच में बन्दर तुम्हारा दोस्त है तो उसे किसी दिन अपने घर खाने पर बुलाओ मै भी उससे मिलना चाहूंगी जो मेरे लिए रोज़ इतने मीठे मीठे जामुन भेजता है और मै भी उसकी खातिर करुँगी | Bandar aur Magarmach ki kahani

बेचारा भोला मगर भी उसकी बातो में आ जाता है और ख़ुशी से कहता है हाँ यह तुमने सही कहा मै आज ही उसे अपने घर खाने पर आने का न्योता दूंगा | मगर की यह बात सुनकर मगर की पत्नी खुश हो जाती है |

मगरमच्छ सुबह ही अपने मित्र बन्दर से मिलने जाता है,और जाकर उसे अपने घर पर खाने का न्योता देता है बन्दर उसकी बात सुनकर खुश होता है और चलने को राजी हो जाता है |

किन्तु बन्दर कहता है मै कैसे तुम्हारे घर चलूँगा मुझे तो तैरना भी नही आता तो मगर कहता है मित्र तुम इस बात की चिंता मत करो मै तुम्हे अपनी पीठ पर बैठा कर ले जाऊंगा | बन्दर पेड़ पर से उछल कर कर मगर की पीठ पर आ जाता है |

नदी के बीच में आने के बाद दंदर कहता है मित्र आज कैसे तुम्हारी पत्नी ने मुझे खाने पर बुलाया क्या कुछ ख़ास बात अहि क्या ? Bandar aur Magarmach ki kahani

तो मगर ने कहा नही मित्र मेरी पत्नी को हमारी दोस्ती पर विश्वास नही है तो उसने मुझे कहा की तुम अपने दोस्त को किसी दिन खाने पर बुलाओ मै भी उससे मिलना चाहती हूँ | बन्दर को मगर की बातो से कुछ सन्देश होता है |

बन्दर कहता है और क्या क्या कहा ?

तो मगर कहता है कुछ दिन पहले मेरी पत्नी मुझसे कह रही थी की मीठे मीठे जामुन खाने वाला बन्दर का कलेजा भी कितना मीठा होगा | इस बात को सुनकर बन्दर सब समझ जाता है और डरने लगता है लेकिन अब वह नदी के बीचो बीच था कुछ कर भी नही सकता था |

तभी उसे एक एक युक्ति समझ आती है वह कहता है मित्र अगर ऐसी बात थी तो तुमने मुहे पहले क्यों नही बताया मेरा कलेजा तो उसी जामुन पेड़ पर टंगा रह गया |

मुर्ख मगर बन्दर की बुद्धिमानी भरी बातो को नही समझ पाता और दोबारा उसे नदी किनारे जामुन के पेड़ के पास ले आता है और कहता है जाओ मित्र कलेजा उतार लाओ |

बंदर भी किनारे आते ही उछल कर जामुन के पेड़ पर चढ़ जाता है और मगर से कहता है अबे मुर्ख क्या भला कोई अपना कलेजा भी निकाल कर रखता है | तुम मेरी दोस्ती के लायक नही आज से मेरी और तुम्हारी दोस्ती भी खत्म और जाकर अपनी पत्नी से कहना तुम सबसे मुर्ख हो जिसे यह भी नहीं पता की कलेजा निकालकर रखने की चीज़ है या फिर नही | Bandar aur Magarmach ki kahani

शिक्षा :- इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि संकट के समय भी हमे घबराना नही चाहिए और बुद्धि से काम लेना चाहिए |

Holi Kyu Manaya Jata hai – होली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है ?

1
Holi-Kyu-Manaya-Jata-hai

भारत एक महान देश है और मुझे यह कहते हुए बहुत गर्व होता है कि मै भारतीय हूँ और मुझे यह गौरब प्राप्त हुआ की मै गंगा,यमुना और सरस्वती जैसी पावन नदियों के देश भारत में मेरा जन्म हुआ | भारत देश की पहचान भिन्न भिन्न तरीको से होती है | यहाँ विभिन्न प्रकार की भाषाएँ बोली जाती है और भिन्न भिन्न प्रकार के लोग पाए जाते है और उनकी परम्परा और संस्कृति भी भिन्न भिन्न होती है | इतनी विभिन्नताओं के होने के बाद भी सभी नागरिक एक दुसरे को समझते है | भारत को त्योहारों का देश भी कहा जाता है तो आज मै आपको होली के बारे में बताने वाला हूँ की Holi Kyu Manaya Jata hai – होली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है ?

Holi Kyu Manaya Jata hai

हर माह में किसी न किसी धर्म के त्यौहार हमेशा ही होते है जैसे होली,दिवाली,ईद,गुरुपर्व,गुड फ्राइडे,क्रिसमस,महावीर जयंती इसके अलावा और भी कई प्रकार के त्योहार होते है और सभी लोग मिल जुलकर एक दुसरे को त्यौहार की बधाईयां देते है और गले मिलते है | तो आज मै आपको रंगों के त्यौहार होली के बारे में कुछ विशेष और होली से जुडी कुछ रोचक जानकारियों से आपको रूबरू कराऊंगा |

Holi Kyu Manaya Jata hai – होली का त्यौहार क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है ?

होली रंगों का त्यौहार है,बच्चे,बूढ़े और जवान सभी लोग आपस में एक दुसरे को रंग लगाते है| उमंग और उत्साह से सराबोर लोग एक दुसरे को रंग,अबीर-गुलाल लगाकर अपनी ख़ुशी जाहिर करते है |

यह होली का त्यौहार हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है,होली रंगों और ख़ुशी का त्यौहार है और यह भारत के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है | रंगों के त्यौहार के रूप में कहे जाने वाले इस पारंपरिक त्यौहार को दो दिन मनाया जाता है | खासतौर पर इसे हिन्दुओ का प्रमुख त्यौहार भी कहा जाता है |

पहले दिन शाम को होलिका दहन होता है और होलिका में लोग गन्ना,गेंहू की बालियाँ, चने की होलो को भुनते है और बाटते है और अगले दिन रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि से होली खेलते है | यह भारत के साथ साथ भारत के पडोसी देशो जैसे नेपाल, बांग्लादेश आदि में भी मनाया जाता है इसी के साथ साथ विदेशो में रह रहे भारतीय भी इसे विदेशो में बड़ी ही धूमधाम से मानते है |

बड़े बुजुर्गो का कहना है कि इस दिन लोग अपनी कटुता,इर्ष्या-द्वेष को भूल कर शत्रु को भी मित्र बना लेते है यह त्यौहार भाईचारे और प्रेम को भी दर्शाता है |

हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद की कथा :-

रंग से भरी होली के पर्व से विभिन्न प्रकार की पौराणिक कथाये जुडी हुई है जिसमे सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक हिरण्यकश्यप नामक एक अत्यंत बलशाली असुर था अपने बलशाली होने के अहंकार वश में वह स्वयं को ईश्वर मानने लगा था और अपनी प्रजा से ईश्वर का नाम न लेने और स्वयं की पूजा करने के लिए विवश करता था और अगर कोई ईश्वर का नाम लेता था या पूजा करता था तो उसे कठोर दंड देता था |

लेकिन हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था प्रह्लाद जो की भगवान विष्णु का भक्त था हिरण्यकश्यप  उसे अनेक प्रकार के कठोर दंड देता था लेकिन प्रह्लाद भगवान की भक्ति करना नही छोड़ता था | अंत में हिरण्यकश्यप  की एक बहन थी होलिका जिसे हिरण्यकश्यप  ने आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ जाये क्योकि होलिका को यह वरदान प्राप्त था की उसे आग जला नही सकती | आदेश के बाद होलिका भी यही करती है वह प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ जाती है |

भगवान विष्णु प्रहलाद की भक्ति से अत्यंत प्रसन्न होते है और होलिका स्वयं ही उस आग में जलकर भस्म हो जाती है और प्रह्लाद को कुछ नही होता | तभी से होली से एक दिन पूर्व होलिका दहन किया जाता है लोग चौराहों पर लकड़ी,कंडे आदि इक्कठे कर होलिका बनाते अहि और होलिका पूजन होता है और रात में होलिका दहन किया जाता है | Holi Kyu Manaya Jata hai

ब्रज की होली :-

ब्रज की होली भारत में होली के पावन पर्व पर एक विशेष आकर्षण का केंद्र होती है क्योकि यहाँ होली खेलने का अंदाज ही कुछ निराला है | ब्रज की होली देश के साथ साथ विदेशो में भी काफी प्रसिद्ध है इसमे पुरुष महिलाओ पर रंग डालते है और महिलाये उन्हें लाठियों और कपडे के बनाये गये कोड़ो से उन्हें मरती है | इसी प्रकार मथुरा और वृन्दावन में भी होली विशेष ढंग से मनाई जाती है होली का यह रंग बिरंगा पर्व यहाँ 15 दिन तक चलता है |

 Holi Kyu Manaya Jata

 

कुछ कथाओ के अनुसार कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इसी दिन पूतना नाम की राक्षसी का वध किया था जिसकी ख़ुशी में गोकुल वासियों ने रंग खेला था तब से यह प्रथा चली आ रही है | इसके बाद श्री कृष्ण अपने बाल सखा संग और राधा रानी व अन्य गोपियों संग आज के दिन होली खेलते थे और इसी प्रकार से मथुरा और वृन्दावन में होली का त्यौहार बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है | 

होली पर विशेष पकवान :-

भारत में जब भी कोई पर्व या फिर कोई विशेष पारम्परिक कार्यक्रम होता है तो विभिन्न प्रकार के पकवान बनाये जाते है तो आज मै आपको होली से जुड़े एक पकवान के बारे में बताता हूँ जी की बेहद ही स्वादिष्ट होता है वह है “गुझिया” इसे खोया,मैदा,मावा आदि से बनाया जाता है यह सभी के घरो में बनाई जाती है|

इसके अलावा कुछ और पकवानों की बात करे तो कांजी बड़े,खीर-पुड़ी,पापड़,चिप्स और इसके अलावा और भी विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार किये जाते है | लोग एक दुसरे के घर जाते है,रंग,अबीर-गुलाल  लगाते है और एक दुसरे के गले मिलकर अपनी ख़ुशी जाहिर करते है और उब सभी मेहमानों को गुझिया,पापड़,चिप्स और कई तरह के पकवान दिए जाते है और यह सिलसिला हर घर में होता है |

होली की शाम को लोग नए कपड़े पहनते है और सब एक दुसरे के घर जाते है जहाँ पर फिर ठंडाई,नमकीन,कांजी बडे और विभिन्न प्रकार के पकवान खाने के लिए दिए जाते है | यह त्यौहार बच्चो के अत्यंत प्रिय त्यौहार है बच्चे एक दिन पहले से ही गुब्बारे, रंग, अबीर-गुलाल,पिचकारी आदि की खरीददारी कर लेते है और होली के दिन ख़ुशी और उत्साह के साथ होली का पर्व का आनंद लेते है | 

होली पर प्राकतिक सौन्दर्य :-

होली का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है प्रकृति इस समय रंग बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है | फाल्गुन माह में मनाये जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहा जाता है | बाग बगीचों में फूलो की कोपले खुल जाती है चारो तरह एक प्राकृतिक सुंदरता अपनी छटा बिखेरती है |

Holi Kyu Manaya Jata hai पेड़-पौधे,पशु-पक्षी और मनुष्य सभी उल्लास से परिपूर्ण हो जाते है | खेतो में गेहूं की बालियाँ इठलाने लगती है ,पक्षी ख़ुशी से चहचहाते है फूलो पर रंग बिरंगी तितलियाँ मंडराने लगती है ,चारो तरफ रंगों की फुहार दिखती है | प्रकृति स्वयं ही होली के आने का सन्देश देती है | 

इतिहास में होली का महत्व :-

इतिहासकारों की माने तो मुग़ल काल में भी होली के संकेत मिलते है कहा जाता है कि अकबर का जोधाबाई और जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन अलवर संग्रहालय में एक चित्र में इन्हें होली खेलते हुए दर्शाया गया है | शाहजहाँ के समय होली खेलने का अंदाज ही कुछ और था उनके समय में होली को ईद-ए-गुलाबी  औरआब-ए-पाशी  (रंगों की फुहार) कहा जाता था |

इसी के साथ अंतिम मुग़ल बादशाह बहादुर शाह जफर के बारे में कहा जाता है की इनके मंत्री इन्हें होली के दिन रंग लगाने आया करते थे और प्रजा जनों को होली की बधाई दी जाती थी |

आधुनिक काल की होली :-

रंगों और खुशियों का त्यौहार है होली लेकिन होली पर हमे होली के विभिन्न रंग देखने को मिलते है | आज प्राकृतिक रंगों की जगह रासायनिक रंगों का प्रचलन हो गया है जिससे त्वचा व आँखों में विभिन्न प्रकार की समस्या देखने को मिलती है | 

इसके अलावा होली के दिन लोग भांग-ठंडाई,शराब आदि का भी सेवन करते है और लडाई झगड़ा करते है रह चलते लोगो के कपड़े फाड़ते है और उन्हें धक्का देते है और कुछ लोग तो ऐसे में कई बार कीचड़ या नाली में भी धक्का दे देते है जिससे कई बार गंभीर परिणाम देखने को मिलते है | होली के पर्व ख़ुशी का त्यौहार है लेकिन ऐसे में स्तिथि यह बनती है पुलिस का भी सहारा लेना पड़ता है | जबकि ऐसे ख़ुशी के माहौल में नही करना चाहिए | होली के त्यौहार को प्रेम और उत्साह पूर्वक मानना चाहिए |

आशा करता हूँ आज का Holi Kyu Manaya Jata hai के विषय आपको जरुर पसंद आया होगा अगर पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करे  तो हमारी तरफ से आपको और आपके पूरे परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं | “Happy Holi”