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Neele Siyar Ki Kahani – नीले सियार की कहानी

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Neele Siyar Ki Kahani
Neele Siyar Ki Kahani

कैसे हो दोस्तों? आशा करता हूँ सब अच्छे होंगे वैसे तो आज की कहानी के बारे में ज्यादातर लोग जानते होंगे और इस कहानी को पहले भी सुना होगा तो अगर आज की कहानी के शीर्षक की बात करूँ तो वह Neela Siyar या फिर Neele Siyar ki Kahani. इस कहानी को कई अलग अलग शीर्षकों से भी जाना जाता है जिसमे इसे रंगा सियार या फिर रंगे सियार की कहानी का भी नाम दिया जाता है।

Neele Siyar Ki Kahani – नीले सियार की कहानी

एक जंगल मे एक सियार का झुंड रहता था वह अकसर ही झुंड में रहकर दूसरे कमजोर जानवरो का शिकार किया करते थे। उन सभी सियारो में से एक ऐसा सियार था जो बहुत आलसी था। 

वह कभी शिकार के लिए अपने साथियों के साथ नही जाता था और न ही उनकी मदद करता था लेकिन शिकार हुए जानवर को खाने में हिस्सा जरूर लगा लेता था। Neele Siyar Ki Kahani

धीरे-धीरे इस तरह काफी समय बीत गया और अब उसके झुंड के सभी सियारो ने मिलकर उसे झुंड से निकालने का निर्णय ले लिया, सभी ने मिलकर फैसला लिया और उस आलसी सियार को झुंड से बाहर निकाल दिया।

बेचारा सियार अब बिल्कुल अकेला हो गया था अब उसके पास खाने का भी कोई साधन नही था Neele Siyar Ki Kahani उसे ठीक से शिकार करना भी नही आता था।

खाने की तलाश में चलते चलते वह एक नगर के पास पहुंचा, उसने सोचा शायद नगर में ही कुछ खाने को मिल जाये यह सोचकर वह नगर में गया।

नगर में कुछ देर इधर उधर ढूंढने के बाद भी उसे कुछ नही मिला बल्कि उसे नगर के कुत्तो ने देख लिया तो उसका पीछा करने लगे। बेचारा भागते भागते एक बड़े से टैंक में छिप गया।

वह टैंक धोबी घाट था जहां टैंक में कपड़ो को रंगने के लिए रंग घोला गया था। जब माहौल कुछ शांत हुआ तो वह बाहर निकला और जंगल की तरफ जाने लगा।

Neele Siyar Ki Kahani जंगल मे जाते समय उसे प्यास लगी तो उसने नदी से पानी पीने के लिए नदी की तरफ अपने कदम बढ़ाए। नदी में पानी पीने को उसने जैसे ही मुँह डाला वह अपनी परछाई देख डर गया।

उसे पानी मे एक नीला जानवर दिख रहा था क्योंकि रात जिस टैंक में वह छिपा था, वह नीले रंग से कपड़ो को रंगने के लिए तैयार किया गया था।

अब अपने नीले रंग को देखकर उसे एक युक्ति सूझी। वह जंगल मे गया और जोर से चिल्लाया  सुनो सुनो सुनो…. जंगल के वासियो सुनो।

आज से इस जंगल का राजा मैं हूँ, मुझे इंद्र भगवान ने भेजा है तुम लोगो की रक्षा के लिए इस जंगल मे सूखा पड़ने वाला है जिससे बचने के लिए इंद्र देव ने मुझे यहां भेजा है। जब तक मैं यहां रहूंगा कोई सूखा नही पड़ेगा।

बेचारे जानवर उसकी बातों में आ गए और वह मजे से रहने लगा। वह अब जानवरो पर अपना हुकुम चलाता था। वह उनसे खाने के लिए तरह तरह की चीज़ें मंगाता और उनसे अपने पैर दबवाता।  Neele Siyar Ki Kahani

सभी जानवर उसकी हरकतों से परेशान हो चुके थे लेकिन बेचारे कुछ नही कर सकते थे। सियार के झुंड में एक सरदार भी था। वह बोला देखने मे मुझे यह अपने जैसा लगता है लेकिन कहता है मुझे इंद्र देव ने भेजा है।

क्यों न हम इसकी परीक्षा ले कि आखिर यह कौन है? सबने सलाह की और जंगल के राजा शेर को सारी बात बताई। 

शेर ने कहा- “ठीक है ! जैसा ठीक समझो करो लेकिन यह पता करो कि यह कौन है?

रोज की तरह फिर सभा लगी नीले सियार के लिए तरह तरह के भोजन लाकर रखे गये। सियार खा ही रहा था। तभी उसे सियार की चिल्लाने की आवाजें आने लगी।

अब था तो वह भी सियार ही, उसने अपने आपको बहुत रोका लेकिन वह ज़्यादा देर चुप न रह सका और जोर जोर से मुँह आसमान की तरफ करके चिल्लाने लगा। 

Neele Siyar Ki Kahani उसके चिल्लाने भर से सभी जानवर उसकी हकीकत को समझ गए, तभी जंगल के राजा शेर ने उसपर झपट कर एक ही बार में सियार को फाड़ दिया और बेचारा सियार अपनी बेवकूफी की वजह से मारा गया।       

Aankho Dekha Sach Nahi Hota – आँखों देखा सच नही होता

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Aankho Dekha Sach Nahi Hota
Aankho Dekha Sach Nahi Hota

दोस्तों जीवन में कई बार कुछ ऐसी परिस्थितियां आ जाती है जब हम बिना सोचे समझे कुछ ऐसा कर देते है जो हमें नही करना चाहिए या कहे कभी कभी हमारा आँखों देखा भी सच नही होता है कुछ इसी सीख पर आज की हमारी कहानी का शीर्षक भी यही है Aankho Dekha Sach Nahi Hota तो चलिए कहानी को विस्तार से जान लेते है :-

Aankho Dekha Sach Nahi Hota – आँखों देखा सच नही होता

एक नगर में बढ़ई रहता था वह एक कुशल कारीगर था उसके हाथों से बनाये गए सभी सामान की लोग बहुत प्रशंसा करते थे। वह अपनी कारीगिरी के लिए बहुत मशहूर था। 

लोग उससे मेज, कुर्सी और अन्य सभी लकड़ी से बनने वाली वस्तुओं को बनवाने के लिए उसके पास आते थे वह अपने कार्य को बड़ी ही लग्न और मेहनत से करता था। कभी कभी कार्य के सिलसिले से वह नगर के बाहर भी जाता था।

एक दिन नगर के सेठ का नौकर बढ़ई के पास आया और बोला- “आपके कार्य को देखकर सेठ जी ने आपको बुलाया है उन्हें आपसे बहुत से कार्य करवाने है जिसके बदले में आपको मुँह मांगी कीमत भी मिलेगी।” Aankho Dekha Sach Nahi Hota

नौकर की बात सुनकर बढ़ई बहुत खुश हुआ और उस नौकर से कहा- “भाई तुम चलो में अभी आता हूँ।”

बढ़ई ने अपनी पत्नी को बुलाकर कहा- ” देखो मै नगर के सेठ के यहां काम के चलते जा रहा हूँ पीछे कोई आये तो उसे बता देना कि मैं बाद में मिलूंगा” और यह कहकर वह चला गया।

बढ़ई की पत्नी अपने घर के कार्य मे लग गई। बढ़ई का एक पुत्र भी था जो अभी 1 वर्ष का था और उसने एक नेवला भी पाला था।

बढ़ई और बढ़ई की पत्नी नेवले को अपने दूसरे बेटे की तरह रखते थे और उसे भी बहुत प्यार दुलार करते थे।

बढ़ई की पत्नी ने नेवले से कहा- “मैं नदी पर पानी लेने जा रही हूं तुम अपना और छोटू का ख्याल रखना, जवाब में नेवले ने हाँ में सिर हिलाया। Aankho Dekha Sach Nahi Hota

अब बढ़ई का बेटा और नेवला आपस मे खेलने लगे और बढ़ई का बेटा खेलते खेलते वही जमीन पर सो गया और नेवला भी वही जमीन पर ही उसके पास लेट गया।

कुछ देर बाद नेवला अचानक उठा उसे न जाने क्यों आस पास सांप की गंध आ रही थी तभी उसकी नजर दरवाजे पर पड़ी उसने देखा बच्चे की तरफ एक काला और लंबा सांप आ रहा था।

वह फुर्ती से उस सांप पर झपटा और दोनों के बीच काफी गहरी लड़ाई होने लगी लड़ाई इस कदर बढ़ गई के नेवले ने सांप के टुकड़े टुकड़े कर दिए और बच्चे के पास बैठ गया।

जब बढ़ई की पत्नी पानी लेकर आई तो उसके आने की आहट से नेवला समझ गया कोई आ रहा है और वह दौड़कर बाहर आंगन में गया।

नेवला तेजी से बाहर भागा और नेवले को तेजी से आते देख बढ़ई की पत्नी अचरज में पड़ गई और जब उसने नेवले के मुंह मे लगे खून को देखा तो उसने सोचा शायद इस जानवर ने मेरे बच्चे को मार डाला। Aankho Dekha Sach Nahi Hota

उसने गुस्से में पानी के मटके को नेवले को ऊपर ही फेक दिया। बेचारा नेवला मटके के नीचे दबकर वही मर गया।

बढ़ई की पत्नी दौड़कर अंदर गयी, उसने देखा अंदर चारो तरह खून ही खून हुआ है और पास में ही एक लंबा और काला सांप मरा पड़ा है और उसका बच्चा पास में ही आराम से सो रहा है।

बढ़ई की पत्नी को अपनी गलती का एहसास हुआ और तभी वह तुरंत बाहर भागी और जाकर नेवले को अपने हाथों में उठाया लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी नेवला मर चुका था।

नेवले को अपने हाथों में लेकर बढ़ई की पत्नी बहुत रोई लेकिन अब सब खत्म हो चुका था। इसलिये कहते है कभी कभी अपनी आंखों का देखा भी सच नही होता। Aankho Dekha Sach Nahi Hota

तो आशा करता हूँ आज की यह कहानी आपको जरुर पसंद आई होगी क्योकि आज की हमारी कहानी का शीर्षक था Aankho Dekha Sach Nahi Hota तो आप भी हमेशा ही अपनी आँखों देखे पर विश्वास न करे |

Sher aur Chuhiya ki Kahani – शेर और चुहिया की कहानी

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Sher aur Chuhiya ki Kahani
Sher aur Chuhiya ki Kahani

आपके अक्सर ही अपनी दादी या नानी से शेर की या फिर अलग अलग प्रकार के जानवरों की कहानी तो सुनी ही होगी और उन कहानियो से हमें हमेशा ही कुछ न कुछ सीखने को ही मिलता है तो आज की कहानी भी कुछ इसी प्रकार की है जिसमे हमे दुसरो की मदद करने की सीख मिलती है आज की हमारी कहानी का शीर्षक है Sher aur Chuhiya ki Kahani तो चलिए बढ़ते है कहानी की तरफ:-

Sher aur Chuhiya ki Kahani – शेर और चुहिया की कहानी

एक जंगल में नदी किनारे एक गुफा थी जिसमे एक शेर रहता था, वह नदी पर पानी पीने आने वाले जानवरों का शिकार करता था। शेर इतना क्रूर था कि वह ज्यादातर जानवरों के बच्चो पर हमला करता था क्योकि बड़े जानवर फुर्ती से भागकर अपनी जान बचा लेते थे और बच्चे छोटे होने के कारण तेजी से नही भाग पाते थे।

कुछ इस प्रकार से वह भोजन ग्रहण करता था जिसके लिए उसे कही जाने की भी जरूरत नही पडती थी। 

सर्दियों सर्दियों के दिन थे सभी जानवर ठंड के कारण अपने अपने घरो में छिपे हुए थे लेकिन जैसे-जैसे दिन चढने लगा सूरज निकल आया और उसकी घूप से मौसम में ठंडक कम हो गयी। उस धूप को लेने के लिए अब सभी जानवर बाहर निकल आये और धूप सेकने लगे।

शेर भी अपनी गुफा से बहार निकल आया और खुले में लेटकर एक लम्बी अंगडाई ली और वही पर पैर पसार कर लेट गया। अच्छी धूप होने के कारण उसकी आँख लग गई। Sher aur Chuhiya ki Kahani

थोड़ी देर में उछलते कूदते वहां पर एक प्यारी सी चुहिया आ गई। वह अपनी मस्ती में मस्त होकर इठलाते हुए जा रही अचानक उसकी नजर शेर पर पड़ी,वह दौड़कर पास की झाड़ी में छिप गई।

कुछ समझ बाद उसने झाड़ी से अपने सिर को बाहर निकाला और देखा शेर सो रहा है। उसने हिम्मत की और शेर के पास पहुंची और उसे आहिस्ता से सहलाया लेकिन शेर ने कोई प्रतिक्रिया नही दी।

चुहिया के द्वारा शेर को आहिस्ता से स्पर्श करना चुहिया को काफी अच्छा लगा। अब चुहिया को शैतानी सूझी वह दौड़कर पेड़ पर चढ़ गई और वहां से उसने शेर पर छलांग लगा दी लेकिन आकार में छोटी होने के कारण शेर को कोई फर्क नही पड़ा। इस तरह चुहिया काफी देर तक शेर के साथ खेलती रही।

अचानक शेर की नींद खुल गई उसने देखा एक छोटी सी चुहिया उसके पेट पर उछल-कूद कर रही है शेर मन ही मन मुस्कुराया और मुँह घुमाकर सो गया। लेकिन अब शेर के कोई प्रतिक्रिया न देने के कारण चुहिया की हिम्मत बढ़ गई।

Sher aur Chuhiya ki Kahani  चुहिया ने अब शेर की मूंछो से खेलने का मन बनाया और जाकर शेर की मूंछ पकड़कर उससे खेलने लगी लेकिन इस बार शेर को गुस्सा आ गया और उसने चुहिया को अपने पंजे से पकड़ लिया चुहिया भी काफी फुर्ती से भागी लेकिन उसकी पूँछ शेर के पंजे में आ गई। 

शेर ने कहा- “अब मैं तुझे नही छोडूंगा। अब तू मेरे पेट मे जाकर उछल कूद करना।” 

यह सुनकर चुहिया घबरा गई और बोली- “महाराज ! मुझे माफ़ करदे ऐसी गलती अब नही होगी। में भूल गई थी आप इस जंगल के राजा है। मुझे माफ़ कर दे, आगे से कभी ऐसी भूल नही होगी। Sher aur Chuhiya ki Kahani 

शेर को चुहिया के इस आवेदन पर दया आ गयी और उसने चुहिया को छोड़ दिया, चुहिया ने शेर को प्रणाम किया और अपने बिल में भाग गई।

धीरे-धीरे समय बीतता रहा और अब गर्मियों के दिन आ गए। कुछ दिन बाद जंगल मे कुछ शिकारी आये उन्होंने नदी किनारे शेर के पंजों के निशान देखे और समझ गए जंगल मे आस पास कोई शेर रहता है। उन्होंने अपना जाल नदी किनारे लगा दिया और चले गए।

गर्मी होने के कारण शेर को प्यास लगी और शेर नदी की तरफ गया नदी किनारे जाकर शेर ने पानी पिया और वापस अपनी गुफा में जाने लगा तबी वह शिकारियों के उस जाल में फस गया। Sher aur Chuhiya ki Kahani 

शेर काफी यत्न कर रहा था उस जाल में से निकलने के लिए लेकिन उसका कोई भी यत्न काम नही आया और वह जाल से निकलने में असमर्थ रहा। वह अब गुस्से में तेज से दहाड़ने लगा।

उसकी दहाड़ से सारा जंगल कांप उठा। उसकी तेज आवाज़ सुनकर गुफा के पास ही बिल में से निकलकर चुहिया ने देखा तो पास ही में शेर एक जाल में फंसा हुआ था, और जाल से निकलने की भरपूर कोशिश कर रहा था। 

चुहिया ने हिम्मत की और शेर के पास पहुंची और बोली- “महाराज ! आप परेशान न हो आपने मुझे जीवन दान दिया था। उसके बदलने में आज मैं आपको एक विपदा से निकलने में आपकी मदद करूँगी।

Sher aur Chuhiya ki Kahani यह कहकर चुहिया ने कुछ ही देर में सारा जाल अपने तेज दांतो से कुतर डाला और शेर आज़ाद हो गया। शेर ने चुहिया को धन्यवाद दिया और दोनों में गहरी मित्रता हो गयी और मिलकर दोनों उस शेर की गुफा में ही रहने लगे।

शिक्षा: आज की कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि हमें सदा अपने से छोटो की मदद करनी चाहिए Sher aur Chuhiya ki Kahani

Makar Sankranti 2022 in Hindi – जाने हम मकर संक्रांति क्यों मनाते है?

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Makar Sankranti 2022 in Hindi
Makar Sankranti 2022 in Hindi

मकर संक्रांति का पर्व हिन्दुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है यह त्यौहार देश भर के अलग-अलग हिस्सों में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन का विशेष महत्त्व माना जाता है और साथ ही मकर संक्रांति से कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित है तो आज मैं आपसे Makar Sankranti 2022 in Hindi – जाने हम मकर संक्रांति क्यों मनाते है के बारे में बात करने वाला हूँ?

मकर संक्रांति को पतंग उड़ाने,दान करने,नदी में स्नान करने आदि विभिन्न तरह की मान्यताओ के आधार पर भी जाना जाता है।  इस त्यौहार को फसल काटने को लेकर भी जोड़ा जाता है तो चलिए इस त्यौहार के बारे में विस्तारपूर्वक जान लेते है साथ ही इससे जुडी मान्यताओ के बारे में भी जान लेते है।

मकर संक्रांति क्या है और हम मकर संक्रांति क्यों मनाते है?

मकर संक्रांति का पर्व हिन्दुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। यह ऋतुओ के परिवर्तन को दर्शाता है, इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाता है और शुभ कार्यो के आरम्भ होने का भी संकेत देता है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है और दक्षिण भारत में इसे पोंगल और असम में इसे बिहू पर्व के रूप में मनाया जाता है।

इस दिन सूर्य धनु राशी से निकलकर मकर राशी में प्रवेश करते है।  यह हर वर्ष 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है और सूर्य के मकर राशी में प्रवेश करने के कारण इसे मकर संक्रांति के नाम सी जाना जाता है।इस दिन सूर्य पूजा का विशेष महत्त्व माना जाता है और इस दिन दान करने साथ ही साथ खिचड़ी खाने की भी परंपरा है।

कहा जाता है मकर संक्रांति के दिन नदी में स्नान करने से सभी प्रकार के कष्ट और बाधाओ से मुक्ति मिलती है और इस परंपरा को देखते हुए मकर संक्रांति की सुबह नदियों के घाट पर लाखो लोग स्नान करते है और सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करते है। अब चलिए Makar Sankranti 2022 in Hindi के विशेष मुहूर्त और इस पर्व से जुडी कुछ पौराणिक कथाओ के बारे में जानते है।

Makar Sankranti 2022 in Hindi की तिथि और शुभ मुहूर्त :-

इस बार मकर संक्रांति पर शुभ मुहूर्त 14 जनवरी की दोपहर को आरम्भ हो रहा है। यह सुबह 8 बजकर 5 मिनट के बाद से स्नान दान का मुहूर्त है और सूर्य दोपहर 2 बजकर 9 मिनट पर मकर राशी में आ रहे है।

मकर संक्रांति का पुण्य काल मुहूर्त दोपहर 2:12 बजे से शाम 5:45 बजे तक है। महापुण्य काल का मुहूर्त दोपहर 2:12 बजे से 2:36 बजे तक है।

मकर संक्रांति 2022 का महत्व और पौराणिक कथाएं:-

पौराणिक कथाओ की मान्यता अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव से मिलने जाते थे। शनि देव मकर और कुम्भ राशी के स्वामी है और उस समय मकर राशी में रहकर उसका प्रतिनिधित्व कर रहे थे। तभी से सूर्य मकर राशि में मकर संक्रांति के दिन प्रवेश करते है। इस मकर संक्रांति के पर्व को पिता पुत्र के मिलने का पर्व भी माना जाता है।

कुछ मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने भी पृथ्वी लोक पर असुरो का संहार कर उनके सिर को काटकर मंदार पर्वत पर गाड दिया था। वह दिन मकर संक्रांति का ही था। भारत के कुछ राज्यों में मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहा जाता है। Makar Sankranti 2022 in Hindi

एक और कथा के अनुसार महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी अपने प्राण त्यागने के लिए मकर संक्रांति के विशेष दिन को ही चुना था। भीष्म पितामह ने मोक्ष पाने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने के पश्चात् अपने शरीर को त्यागा था क्योकि माना जाता है उत्तरायण में शरीर त्यागने वाले व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मकर संक्रांति के दिन और इस पर्व के शुभ अवसर पर नदी में स्नान करना, व्रत करना, दान पुण्य करना साथ ही भगवान सूर्य और शनि की उपासना करना बेहद ही शुभ माना जाता है। संक्रांति के दिन पितरो का ध्यान और उनका तर्पण भी किया जाता है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में इस दिन को फसल काटने के तौर पर भी इस पर्व को मनाया जाता है।

इस दिन तिल, गुड, और खिचड़ी खाने का विशेष महत्त्व माना जाता है। देश के कई हिस्सों में संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की भी परम्परा देखने को मिलती है।

Makar Sankranti 2022 मकर संक्रांति पर क्या करे?

  • इस दिन सुबह स्नान कर लोटे में लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य भगवान को अर्घ दे।
  • सूर्य देव के बीजमंत्रो का जाप करे। Makar Sankranti 2022 in Hindi
  • श्रीमद्भागवत के कम से कम एक अध्याय का पाठ करे या फिर गीता का पाठ करे।
  • नए अन्न, कम्बल, तिल, घी और खिचड़ी आदि का दान करे।
  • भोजन में नए अन्न की खिचड़ी बनाये और भगवान को समर्पित करे और प्रसाद रूप में ग्रहण करे।
  • संध्याकाल में जब सूर्य देव छिप रहे हो तब अन्न ग्रहण न करे।
  • इस दिन किसी गरीब व्यक्ति को बर्तन समेत तिल का दान करने से शनि से जुडी हर पीड़ा से मुक्ति मिलती है।

 

Lohri 2022 History in Hindi-लोहड़ी क्या है और लोहड़ी क्यों मनाते है जाने हिंदी में ?

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Lohri 2022 History in Hindi
Lohri 2022 History in Hindi

भारतवर्ष में वैसे तो पूरे वर्ष ही विभिन्न प्रकार के त्यौहारों की धूम रहती है लेकिन जनवरी का महिना कुछ ख़ास होता है। जब ठंड के महीने में लोहड़ी और मकर संक्रांति का पर्व आता है विशेषकर पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में लोहड़ी और मकर संक्रांति का इंतजार बेसब्री से किया जाता है, तो चलिए जानते है Lohri 2022 History in Hindi के बारे में साथ ही साथ इसकी मान्यताओ के बारे में भी जान लेते है।

लोहड़ी का पर्व पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से मनाया जाता है यह पर्व हर वर्ष 13 जनवरी को मनाया जाता है।  तो अब लोहड़ी के बारे में विस्तार से जान लेते है कि आखिर लोहड़ी का क्या इतिहास है और इसे क्यों मनाया जाता है और इस त्यौहार को किस तरह मनाया जाता है?

लोहड़ी क्या है इस दिन क्या होता है?

जनवरी का महीना आते ही लोहड़ी और मकर संक्रांति की धूम चारो तरफ देखने को मिलती है प्रकृति भी धीरे धीरे शीत ऋतु से वसंत ऋतु में परिवर्तित होने लगती है। लोहड़ी विशेषकर उत्तर भारत के पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।  लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी को हर वर्ष मनाया जाता है लोहड़ी को लाल लोई भी कहा जाता है। Lohri 2022 History in Hindi

लोहड़ी और मकर संक्रांति मनाने के पीछे मान्यता है कि लोहड़ी और मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर नए अन्न के तैयार होने और फसल के कटने के उपलक्ष्य में यह त्यौहार मनाये जाते है।  पंजाबी किसान लोहड़ी के इस पर्व के बाद वितीय वर्ष की भी शुरुआत करते है।

इस त्यौहार के दिन सभी लोग शाम को एक जगह एकत्र होकर आग जलाते है और उसके चारो तरफ एकत्र होकर उस आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की और गुड़ से बनी चीजे डालते है और परिक्रमा करते है और खूब नाचते गाते है।

Lohri 2022 History in Hindi – लोहड़ी का इतिहास क्या है?

इतिहासकारो और कई मान्यताओ के अनुसार लोहड़ी का पर्व दुल्ला भट्टी की कथा से संबंधित है।  वह अमीरों को लूटता था और उन अमीरों से लूटा हुआ धन गरीबो में बाँट दिया करता था। दुल्ला भट्टी ने पंजाब की लडकियों की मदद उस वक्त की जब उन्हें अमीर सौदागरों और मुग़ल सैनिको को बेचा जा रहा था।

दुल्ला भट्टी ने उन सभी लडकियों को उन मुग़ल सैनिको और सौदागरों से छुडवाया और साथ ही साथ उन लडकियो की शादी हिन्दू लडको से करवाई। तभी से दुल्ला भट्टी को “पंजाब के नायक” की उपाधि मिली और उनके प्रति लोगो के मन में सम्मान पैदा हो गया तब से दुल्ला भट्टी को लोहड़ी के दिन जरुर याद किया जाता है और कई लोगो का कहना है कि दुल्ला भट्टी की याद में ही लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है।

Who is Dulla Bhatti-दुल्ला भट्टी कौन थे ?

Lohri 2022 History in Hindi दुल्ला भट्टी भारत के मध्यकाल का एक वीर था जिसने अकबर के शासन में मुगलों के विरुद्ध विद्रोह किया था उन्हें लोग अब्दुल भट्टी कहकर भी पुकारते थे। उनका जन्म पाकिस्तान के पंजाब के एक राजपूत परिवार लद्दी और फरीद खान के यहाँ सन 1547 में हुआ था उन्हें पंजाब पुत्र भी कहा जाता है।

उनके जन्म से ठीक चार महीने पहले उनके दादा संदल भट्टी और बाप को हुमायूँ ने मरवा दिया था और उनकी खाल में भूसा भरवा कर गाँव के बाहर लटकवा दिया था वजह बस यह थी की उन्होंने मुगलों को लगान देने से इंकार कर दिया था।

दुल्ला भट्टी उस ज़माने के रोबिनहुड हुआ करते थे, अकबर उन्हें डकैत मानता था। दुल्ला भट्टी अक्सर ही अमीरों से, सौदागरों से और मुग़ल सैनिको को लूट लिया करते थे और उनसे लूटा हुआ सभी समाना गरीबो में बाँट दिया करते थे। उन्होंने अकबर को इस कदर परेशान किया था कि अकबर को अपनी राजधानी आगरे से लाहौर शिफ्ट करनी पड़ी थी सच तो यह था कि हिन्दुस्तान का शहंशाह डरता था दुल्ला भट्टी से।