Akbar or Birbal Ke kisse – अकबर बीरबल के किस्से और कहानी

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Akbar or Birbal Ke kisse
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दोस्तों हमेशा की तरह आज भी मैं आपके लिए एक मजेदार कहानी लेकर आया हूँ जिसका नाम है Akbar or Birbal Ke kisse – अकबर बीरबल के किस्से और कहानी जी हाँ आज मैं आपके लिए अकबर और बीरबल से जुडी एक कहानी लेकर आया हूँ। आज की कहानी से आपको एक सीख भी मिलेगी तो वह क्या है चलिए जानते है विस्तार से:- 

Akbar or Birbal Ke kisse – अकबर बीरबल के किस्से और कहानी

बादशाह अकबर के नौ रत्नों में से सबसे बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति थे बीरबल । बादशाह अकबर अपने राज काज की हर बात बीरबल से सलाह लेकर ही किया करते थे । साथ ही साथ बादशाह अकबर बीरबल को बहुत मानते भी थे ।

बीरबल बड़े बुद्धिमान् थे और अपनी विनोद पूर्ण बातों से बादशाह को प्रसन्न रखते थे । Akbar or Birbal Ke kisse बीरबल के पास बादशाह अकबर की हर परेशानी का हल होता था और वह हमेशा बादशाह के मन में उठ रहे सवालो के सटीक और सही जवाब देते थे। अकबर और बीरबल के विनोद की बहुत – सी बातें प्रचलित हैं । उनमें से कुछ बातें बड़े काम की हैं ।

एक घटना हम यहाँ सुना रहे हैं । एक बार बादशाह अपने राजमहल में गये । बादशाह की सबसे प्यारी बेगम उस समय अपनी किसी सखी से बातें कर रही थीं । बादशाह अचानक जाकर खड़े हो गये और वह बेगम और उसकी सहली की बातें वही खड़े होकर सुनने लगे ।  

बेगम और उनकी सहली किसी को भी बादशाह के आने की खबर नही हुई। लेकिन एक सेविका ने बादशाह को सलाम किया और कक्ष में आने का न्योता दिया तब बेगम और उनकी सहेली को बादशाह ने आने का पता चला।

Akbar or Birbal Ke kisse बेगम उठ खड़ी हुई और हँसती हुई बोलीं- ‘ आइये मूर्खराज ! ‘ अपनी सबसे प्यारी बेगम के मुख से अपने लिए मूर्खराज  सुनकर बादशाह को कुछ समझ नही आया लेकिन बादशाह को बहुत बुरा लगा ।

बेगम ने इससे पहले कभी बादशाह का अपमान नहीं किया था । बादशाह जानते थे कि बेगम बुद्धिमती हैं । वे बिना कारण के ऐसी बात नहीं कह सकतीं । लेकिन फिर भी बादशाह इस बात को लेकर गहन सोच में पड़ गये कि आज उन्हें बेगम ने मूर्खराज कहकर क्यों संबोधित किया यह तो एक बादशाह के लिए अपमानजनक है।

लेकिन बादशाह यह नहीं जान सके कि बेगप ने उन्हें मूर्खराज क्यों कहा । बेगम से पूछना बादशाह को अच्छा नहीं लगा । थोड़ी देर वहाँ रहकर वे अपने कमरे में चले आये । बादशाह उदास बैठे थे । उसी समय बीरबल उनके पास आये ।

बीरबल को देखते ही बादशाह ने बीरबल को कहा- ‘ आइये मूर्खराज ! ” बीरबल ने भी बादशाह की बात का जवाब दिया और हँसकर बोले – ‘ जी मूर्खराज जी ! ‘ बादशाह ने अब बीरबल के मुख से अपने लिए मूर्खराज सुना तो बादशाह बीरबल को आँख चढ़ाकर कहने लगे – ‘ बीरबल ! तुम मुझे मूर्खराज क्यों कहते हो यह मेरा अपमान है? Akbar or Birbal Ke kisse

बीरबल ने कहा- बादशाह सलामत ! ‘आप क्रोधित क्यों होते है मेरी बात सुनिए, मनुष्य पाँच प्रकार से मूर्ख कहलाता है । यदि दो व्यक्ति अकेले में बातें कर रहे हो और वहाँ कोई बिना बुलाये या बिना सूचना दिये जा खड़ा हो तो उसे मूर्ख कहा जाता है ।

दो व्यक्ति बातचीत कर रहे हो और उसमें तीसरा व्यक्ति बीच में पड़कर उनकी बात पूरी हुए बिना बोलने लगे तो वह भी मूर्ख कहा जाता है ।

कोई अपने से कुछ कह रहा हो तो उसकी पूरी बात सुने बिना बीच में बोलने वाला भी मूर्ख माना जाता है ।

जो बिना अपराध और बिना दोष के दूसरों को गाली दे और दोष लगाये , वह भी मूर्ख है ।

Akbar or Birbal Ke kisse इसी प्रकार जो मूर्ख के पास जाय और मूखों का संग करे , वह भी मूर्ख है । ‘ बादशाह बीरबल के उत्तर से बहुत प्रसन्न हुए।

शिक्षा: मुर्ख के प्रकार के बारे में तुम भी इन बातों को स्मरण कर लो । कभी ऐसी कोई भूल तुमसे नहीं होनी चाहिये कि लोग तुम्हें भी मूर्खराज कह सकें।

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